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पत्नी अवैध हो सकती है संतान नहीं : हाई कोर्ट

सन्मार्ग संवाददाता

कोलकाता : Calcutta High Court ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि अवैध संतान (शादी के बाहर जन्मे बच्चे) भी सरकारी कर्मचारी की पेंशन संबंधी लाभ पाने के हकदार होते हैं। अदालत ने 17 मार्च को दिए आदेश में पूर्वी रेलवे को एक गेटमैन की पहली पत्नी और दूसरी पत्नी से जन्मी 15 वर्षीय बेटी का नाम सेवा एवं पेंशन रिकॉर्ड में शामिल करने का निर्देश दिया। न्यायमूर्ति Krishna Rao ने कहा, “यह स्थापित कानून है कि अवैध संतान भी सरकारी कर्मचारी से मिलने वाले लाभों की हकदार होती है।” अदालत ने रेलवे अधिकारियों को आठ सप्ताह के भीतर पेंशन प्रक्रिया पूरी कर सभी संबंधित लाभ, जिसमें मासिक पेंशन भी शामिल है, जारी करने का आदेश दिया। मामला तब सामने आया जब पहली पत्नी (50) ने हाई कोर्ट में याचिका दायर कर आरोप लगाया कि उसके पति ने बिना तलाक लिए दूसरी शादी कर ली और सेवा पुस्तिका से उसका तथा उसके बेटे का नाम हटाकर दूसरी पत्नी और उसकी बेटी का नाम जोड़ दिया। उसने यह भी कहा कि वह मिर्गी की मरीज है और 2012 से पति ने भरण-पोषण भी नहीं दिया, जिससे वह आर्थिक संकट में है। रेलवे की ओर से जवाब में कहा गया कि हिंदू विवाह अधिनियम के अनुसार दूसरी शादी अमान्य है, लेकिन कानून के तहत पहली पत्नी और दूसरी पत्नी की बेटी—दोनों को 50-50 प्रतिशत लाभ मिल सकता है। सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि पति-पत्नी के बीच कोई तलाक डिक्री नहीं है, इसलिए पहली पत्नी ही कानूनी रूप से मान्य है। अदालत ने स्पष्ट किया कि दूसरी पत्नी को पेंशन का कोई अधिकार नहीं होगा, लेकिन उसकी बेटी को लाभ पाने का अधिकार रहेगा और उसका नाम पेंशन रिकॉर्ड में शामिल किया जाएगा।


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