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जनरल कॉल-ऑफ को व्यापक समर्थन, दोपहर 2-5 प्रदर्शन जारी

डीम्ड यूनिवर्सिटी के विरोध में 90% बंद, आंदोलन ‘अस्थायी रूप से स्थगित’

संयुक्त एक्शन फोरम की प्रेस वार्ता में बड़ा ऐलान

उच्च न्यायालय में याचिका और केंद्र तक मुद्दा ले जाने की तैयारी

सन्मार्ग संवाददाता

श्री विजयपुरम : डीम्ड यूनिवर्सिटी के विरोध में दिन भर के सफल “जनरल कॉल-ऑफ” के बाद संयुक्त एक्शन फोरम के को-कन्वीनर एवं अध्यक्ष राकेश पाल गोबिंद ने आज एक प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए कहा कि पिछले नौ दिनों से विभिन्न कॉलेजों के छात्र डीम्ड यूनिवर्सिटी के प्रस्ताव के खिलाफ शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे हैं और जनता का यह समर्थन उनके मनोबल को मजबूत करने वाला है। सोमवार को आयोजित “जनरल कॉल-ऑफ” सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ, जिसमें अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह में लगभग 90 प्रतिशत दुकानों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों ने स्वेच्छा से बंद रखकर छात्रों के समर्थन में एकजुटता दिखाई। एडवोकेट राकेश पाल गोबिंद ने कहा कि इस जनरल कॉल-ऑफ को सभी राजनीतिक दलों, सामाजिक संगठनों और विभिन्न संघों का भरपूर समर्थन मिला। उन्होंने भावुक स्वर में कहा कि “सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि लोग उन बच्चों के लिए भी त्याग करने को तैयार हैं, जिन्हें उन्होंने देखा तक नहीं, लेकिन उनके भविष्य की चिंता हर किसी को है।”उन्होंने स्पष्ट किया कि आंदोलन को समाप्त नहीं किया गया है, बल्कि फिलहाल “अस्थायी रूप से स्थगित” किया जा रहा है। अब छात्र प्रतिदिन अपने कॉलेजों में कक्षाएं अटेंड करने के बाद दोपहर 2 बजे से 5 बजे तक अपने-अपने कॉलेज परिसरों के सामने शांतिपूर्ण प्रदर्शन जारी रखेंगे, जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं हो जातीं। फोरम की ओर से यह भी घोषणा की गई कि कल उच्च न्यायालय में याचिका दायर की जाएगी तथा इस मुद्दे को केंद्रीय मंत्रालय तक ले जाया जाएगा। साथ ही सभी राजनीतिक दलों के सांसदों को एक संयुक्त प्रतिनिधित्व सौंपा जाएगा ताकि आगामी संसद सत्र में इस विषय को उठाया जा सके। एडवोकेट गोबिंद ने प्रशासन से भी सहयोग की अपील करते हुए कहा कि कम से कम समीक्षा की दिशा में सकारात्मक कदम उठाए जाएं। उन्होंने दोहराया कि यह मुहिम जारी रहेगी और छात्रों के हितों से कोई समझौता नहीं होगा। इससे पूर्व एएनटीसीसी के अध्यक्ष रंगोलाल हलदर ने सभा का स्वागत करते हुए कहा कि डिगलीपुर से लेकर कैंपबेल बे तक पूरे द्वीपसमूह की जनता ने जनरल कॉल-ऑफ का समर्थन कर यह साबित कर दिया है कि वे छात्रों के साथ खड़ी है। उन्होंने सभी राजनीतिक दलों, सामाजिक संगठनों और आम नागरिकों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह एक सामूहिक जनआंदोलन है, जिसका उद्देश्य केवल द्वीपों के छात्रों के भविष्य की रक्षा करना है।


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