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मुर्शिदाबाद हिंसा मामले में UAPA क्यों जरूरी, सुप्रीम कोर्ट ने NIA को रिपोर्ट देने को कहा

पश्चिम बंगाल सरकार की अपील का निस्तारण करते हुए प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने राज्य सरकार को मुर्शिदाबाद हिंसा मामले में एनआईए की जांच के खिलाफ अपनी शिकायतों के साथ उच्च न्यायालय में जाने के लिए कहा।

Narendra Kumar Singh

नई दिल्लीः उच्चतम न्यायालय ने बुधवार को राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) को निर्देश दिया है कि वह पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले में कई हुई हिंसा और अशांति से संबंधित एक मामले में आतंकवाद से जुड़े कठोर प्रावधानों वाले गैर कानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम (यूएपीए) के इस्तेमाल का औचित्य स्पष्ट करते हुए कलकत्ता उच्च न्यायालय में सीलबंद लिफाफे में रिपोर्ट दाखिल करे।

पश्चिम बंगाल सरकार की अपील का निस्तारण करते हुए प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने राज्य सरकार को मुर्शिदाबाद हिंसा मामले में एनआईए की जांच के खिलाफ अपनी शिकायतों के साथ उच्च न्यायालय में जाने के लिए भी कहा। शीर्ष अदालत ने कहा कि कलकत्ता उच्च न्यायालय इस मामले में एनआईए जांच का आदेश देने के केंद्र के फैसले को राज्य सरकार द्वारा दी गई चुनौती की भी जांच कर सकता है।

उच्च न्यायालय ने मुर्शिदाबाद जिले में कई बार हुई हिंसा और अशांति की घटनाओं पर 20 जनवरी को चिंता व्यक्त करते हुए पुलिस और प्रशासन को वहां शांति बनाए रखने का निर्देश दिया। मुख्य न्यायाधीश सुजॉय पॉल की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने कहा कि राज्य सरकार आवश्यकता पड़ने पर केंद्रीय बलों की मांग कर सकती है। उच्च न्यायालय ने यह भी कहा कि केंद्र सरकार एनआईए द्वारा जांच कराने के संबंध में निर्णय लेने से पहले राज्य सरकार की रिपोर्ट का अध्ययन करेगी। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने 28 जनवरी को इस मामले में एनआईए जांच का आदेश दिया था।

पड़ोसी राज्यों में प्रवासी श्रमिकों पर कथित हमलों के संबंध में मुर्शिदाबाद जिले के बेलडांगा में हुई हिंसा के मद्देनजर वहां केंद्रीय बलों की तैनाती की मांग करते हुए उच्च न्यायालय में दो जनहित याचिकाएं दायर की गईं।

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