नई दिल्लीः भारत में आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस यानी एआई पर दुनिया का सबसे बड़ा समिट शुरू हो गया है। इस समिट में दुनिया भर के एआई विशेषज्ञ हिस्सा ले रहे हैं, लेकिन क्या एआई का भविष्य में मनुष्य पर प्रभाव का सटिक आकलन किया जा सकेगा, ऐसा लगता है कि अभी तक इसका सटिक अनुमान नहीं लगाया जा सका है।
एआई के गॉडफादर कहे जाने वाले मशहूर कंप्यूटर वैज्ञानिक योशुआ बेंजियो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को लेकर ऐसे खुलासे किए हैं जो आपको सोचने पर मजबूर कर देगा। जिस AI ने पूरी दुनिया में बड़े बदलाव कर दिए हैं। वो एआई अब अपने बनाने वालों के नियंत्रण से बाहर जाने के भी तरीके ढूंढ रहे हैं। यहां तक कि कई बार एआई ने कोशिश भी की है। बेंजियो ने बताया है कि पहले इन बातों को हम सैद्धांतिक मानते थे। यानी जो चीजें किताबों में हैं लेकिन असल में दिख नहीं रही थी। लेकिन पिछले साल से चीजें बिल्कुल बदलती दिख रही हैं।
AI हमारे आदेश की ही मुखालफत कर रहा
बेंजियो ने एक इंटरव्यू में ऐसे-ऐसे खुलासे किए हैं जो आपको फिक्शन मूवी या फिक्शन किताब की तरह लग सकती हैं, लेकिन अब वो हकीकत दिख रहा है। एआई के पितामह बेंजियो ने कहा कि दिसंबर 2024 से पहले हम एआई से होने वाले खतरों पर केवल सैद्धांतिक तौर पर विचार करते थे। यानी जो अभी हकीकत नहीं है, लेकिन 2024 में हमने देखा कि एआई हमारे आदेश की ही मुखालफत कर रहा था। यहां तक कि हमारे इंजीनियर के कोड के खिलाफ जाकर वो अपने हिसाब से चीजें करने की कोशिश कर रहा था। उन्होंने बताया कि एआई अपने हिसाब से गोल तक सेट करने लगा। बेंजियो ने कहा कि इंसान जो AI के इंस्ट्रक्शन दे रहा था वो उसके परे जाकर खुद अपना सोर्स ढूंढने में लगा था। एआई के गॉडफादर कहे जाने वाले कनाडा के कंप्यूटर साइंटिस्ट योशुआ बेंगियो ने कहा है कि एआई इंसानी कंट्रोल से बाहर होना शुरू हो गई है।
AI कंपनियों को सेफ्टी पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए
एआई में तेजी से हो रहे एडवांसमेंट को देखते हुए बेंगियो समेत 100 से अधिक रिसर्चर ने कहा है कि एआई कंपनियों को सेफ्टी पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए। हाल ही में रिलीज हुई 2026 इंटरनेशनल एआई सेफ्टी रिपोर्ट में इन रिसर्चर ने कहा है कि पावरफुल एआई बनाते समय कंपनियों को अपने प्रॉफिट से ज्यादा सेफ्टी को आगे रखना चाहिए। इस रिपोर्ट में बताया गया है कि अब जनरल यूज वाले एआई मॉडल PhD-level के साइंटिस्ट के बराबर नॉलेज रखते हैं। इन्हें काम करने के लिए इंसानी इनपुट की बहुत कम जरूरत रह गई है। अभी दुनियाभर में हर हफ्ते 70 करोड़ लोग एडवांस्ड एआई टूल्स का यूज कर रहे हैं और यह संख्या लगातार बढ़ती जा रही है।
एक्सपर्ट्स ने चेतावनी दी है कि एआई के साथ-साथ जोखिम भी बढ़ रहे हैं। अब साइबर क्राइम के मामलों में इजाफा देखा जा रहा है और ऐसे लगभग 90 प्रतिशत मामलों में एआई का यूज किया जा रहा है। इसी तरह बायोटेक्नोलॉजी में कुछ सिस्टम ने इंसानों को पीछे छोड़ दिया है। इससे बीमारियों से बचाव में मदद मिलेगी, लेकिन इसका दुरुपयोग कर इससे बायोलॉजिक हथियार डेवलप किए जाने का खतरा भी बढ़ गया है।