नई दिल्लीः उच्चतम न्यायालय ने तिरुमाला लड्डू विवाद के बारे में पोस्टर या सार्वजनिक बयानों के माध्यम से कथित तौर पर गलत सूचना फैलाने वाले व्यक्तियों या संगठनों के खिलाफ कार्रवाई करने का निर्देश देने संबंधी याचिका पर शुक्रवार को सुनवाई करने से इनकार कर दिया।
उच्चतम न्यायालय ने लड्डू विवाद मामले में ‘‘करोड़ों लोगों की भावनाओं को शांत करने’’ के लिए चार अक्टूबर, 2024 को तिरुपति में लड्डू बनाने में पशु चर्बी के इस्तेमाल के आरोपों की जांच के लिए पांच सदस्यीय स्वतंत्र विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया था। न्यायालय ने इसके साथ ही यह स्पष्ट किया था कि अदालत को ‘‘राजनीतिक युद्धक्षेत्र’’ के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है।
प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने कहा कि इस सिलसिले में आपराधिक मामला दर्ज कर लिया गया है और जांच जारी है। पीठ ने कहा कि याचिकाकर्ता या कोई भी अन्य इच्छुक व्यक्ति जांच को तार्किक निष्कर्ष तक पहुंचाने के उद्देश्य से जांच एजेंसी को कोई भी सामग्री (यदि कोई हो तो) प्रस्तुत कर सकता है।
क्या है तिरुमाला लड्डू विवाद
आंध्र प्रदेश के तिरुपति तिरुमाला बालाजी मंदिर में भक्तों को बांटे जाने वाले प्रसाद (लड्डू) में मिलावट का आरोप उठा था। आरोप है कि लड्डू बनाने में इस्तेमाल होने वाले घी में मछली के तेल और जानवरों की चर्बी (बीफ टेलो, लार्ड) का उपयोग किया गया, जो हिंदू भावनाओं के खिलाफ है। इस मामले की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट ने SIT गठित की है।
आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने आरोप लगाया कि पिछली सरकार के दौरान लड्डू के घी में पशु चर्बी मिली थी। गुजरात की प्रयोगशाला की रिपोर्ट का हवाला देकर दावा किया गया कि घी में 'विदेशी वसा' (एनिमल फैट) पाई गई। एआर डेरी पर मिलावटी घी की आपूर्ति करने का आरोप लगा, लेकिन कंपनी ने इसे गलत बताया है। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की जांच के लिए सीबीआई के नेतृत्व वाली विशेष जांच दल (SIT) को मंजूरी दी, जिसने अपनी फाइनल चार्जशीट में 36 लोगों को नामजद किया है।