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UGC के नए नियमों पर रोक पर क्या बोले अखिलेश और मायावती

माजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने यूजीसी के जातिगत भेदभाव को रोकने के लिए हाल में अधिसूचित नियमों पर उच्चतम न्यायालय द्वारा रोक लगाने के फैसले का स्वागत किया।

लखनऊः समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने बृहस्पतिवार को विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के जातिगत भेदभाव को रोकने के लिए हाल में अधिसूचित नियमों पर उच्चतम न्यायालय द्वारा रोक लगाने के फैसले का स्वागत किया और कहा कि सच्चा न्याय यह सुनिश्चित करने में है कि किसी पर भी अत्याचार या अन्याय न हो।

यादव ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ‘‘सच्चा न्याय किसी के साथ अन्याय नहीं होता है, माननीय न्यायालय यही सुनिश्चित करता है। कानून की भाषा भी साफ होनी चाहिए और भाव भी। बात सिर्फ़ नियम नहीं, नीयत की भी होती है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘न किसी का उत्पीड़न हो, न किसी के साथ अन्याय, न किसी पर जुल्म-ज्यादती हो, न किसी के साथ नाइंसाफ़ी।’’

मायावती बोलीं किसी के साथ अन्याय न हो

बसपा प्रमुख मायावती ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने देश के सरकारी व निजी विश्वविद्यालयों मे जातिवादी घटनाओं को रोकने के लिए जो नये नियम लागू किये गये हैं, उनसे सामाजिक तनाव का वातावरण पैदा हो गया है। ऐसे वर्तमान हालात को मद्देनजर रखते हुये माननीय उच्चतम न्यायालय का यूजीसी के नये नियम पर रोक लगाने का आज का फैसला उचित है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘जबकि देश में, इस मामले में सामाजिक तनाव आदि का वातावरण पैदा ही नहीं होता अगर यूजीसी नये नियम को लागू करने से पहले सभी पक्ष को विश्वास में ले लेती और जांच समिति आदि में भी सवर्ण समुदाय को ‘प्राकृतिक न्याय’ के अन्तर्गत उचित प्रतिनिधित्व दे देती।’’

सुप्रीम कोर्ट ने आज लगाई है रोक

इससे पहले उच्चतम न्यायालय ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के हालिया नियमों के खिलाफ दायर कई याचिकाओं पर बृहस्पतिवार को सुनवाई करते हुए इस पर रोक लगा दी। इन याचिकाओं में दलील दी गई थी कि आयोग ने जाति-आधारित भेदभाव की गैर-समावेशी परिभाषा अपनाई है और कुछ श्रेणियों को संस्थागत संरक्षण से बाहर रखा है।

प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने विनियमन को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर केंद्र और यूजीसी को नोटिस जारी किए। उच्च शिक्षण संस्थानों में भेदभाव संबंधी शिकायतों की जांच करने और समानता को बढ़ावा देने के लिए सभी संस्थानों द्वारा ‘‘समानता समितियां’’ गठित करने को अनिवार्य बनाने संबंधी नए नियम 13 जनवरी को अधिसूचित किए गए थे।

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