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10 मार्च के बाद सप्लीमेंट्री सूची जारी होने की संभावना

एडजुडिकेशन मतदाताओं की सप्लीमेंट्री सूची पर सुप्रीम कोर्ट की निगरानी कोर्ट की हरी झंडी के बाद ही आयोग करेगा प्रकाशित

केडी पार्थ, सन्मार्ग संवाददाता

कोलकाता : राज्य में अंडर एडजुडिकेशन श्रेणी में रखे गए मतदाताओं की सप्लीमेंट्री सूची अब कलकत्ता कोर्ट के निर्देशों के तहत जारी की जाएगी। चुनाव आयोग कलकत्ता हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के नेतृत्व में गठित कमेटी से सलाह-मशविरा करने के बाद ही इस सूची को प्रकाशित करेगा। सूत्रों के मुताबिक 9 या 10 मार्च को इस कमेटी के साथ बैठक हो सकती है, जिसके बाद 10 मार्च के बाद सप्लीमेंट्री सूची जारी होने की संभावना है।

80 हजार पार्ट में फैले हैं ऐसे मतदाता

राज्य में करीब 80 हजार मतदान पार्ट (पोलिंग पार्ट) हैं और लगभग सभी क्षेत्रों में इस श्रेणी के मतदाताओं के नाम शामिल हैं। इसी वजह से दस्तावेजों की जांच का काम बड़े स्तर पर किया जा रहा है और इसे जल्द पूरा करने के लिए प्रक्रिया तेज कर दी गई है।

साढ़े आठ लाख दस्तावेजों की जांच पूरी

शनिवार शाम तक करीब साढ़े आठ लाख मतदाताओं के दस्तावेजों की जांच न्यायिक अधिकारियों द्वारा पूरी कर ली गई है। बाकी मतदाताओं के दस्तावेजों की जांच तेजी से जारी है, ताकि जल्द ही पूरी रिपोर्ट तैयार की जा सके।

60 लाख मतदाता रखे गए अंडर एडजुडिकेशन श्रेणी में

चुनाव आयोग ने राज्य में करीब 60 लाख मतदाताओं को अंडर एडजुडिकेशन श्रेणी में रखा है। इन मतदाताओं द्वारा अपलोड किए गए दस्तावेजों पर चुनाव आयोग को संदेह है, इसलिए उनके दस्तावेजों की विशेष जांच की जा रही है।

सप्लीमेंट्री सूची जारी करने से पहले होगी कमेटी के साथ बैठक

सप्लीमेंट्री सूची जारी करने से पहले कलकत्ता हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के नेतृत्व में बनी कमेटी के साथ बैठक की जाएगी। माना जा रहा है कि 9 या 10 मार्च को यह बैठक हो सकती है, जिसके बाद आयोग अंतिम निर्णय लेगा।

नाम खारिज होने पर सीधे आयोग में अपील संभव नहीं

अंडर एडजुडिकेशन श्रेणी में शामिल मतदाताओं के नाम यदि सूची से खारिज कर दिए जाते हैं, तो वे सीधे सीईओ या चुनाव आयोग के पास अपील नहीं कर पाएंगे। उन्हें इसके लिए सीधे सुप्रीम कोर्ट का रुख करना होगा, क्योंकि दस्तावेजों की जांच सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर की जा रही है।

सबजुडिस नहीं होता तो स्थानीय स्तर पर संभव थी अपील

राज्य के मुख्य चुनाव अधिकारी मनोज अग्रवाल के अनुसार, यदि यह मामला न्यायालय में विचाराधीन (सबजुडिस) नहीं होता, तो ऐसे मतदाता सीधे सीईओ या डीईओ के पास आवेदन देकर अपने दस्तावेजों की समीक्षा करा सकते थे।

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