तीन अलग-अलग श्रेणियों के नागरिकों ने भरा फॉर्म
केडी पार्थ, सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : आगामी चुनावों से पहले पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची को दुरुस्त करने की कवायद तेज हो गई है। स्पेशल इंटेंसिफाइड रिवीजन (SIR) और नए नाम जोड़ने की प्रक्रिया के तहत अब तक 3 लाख 13 हजार लोगों ने नया मतदाता फॉर्म-6 भर दिया है। मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) कार्यालय के अनुसार, ये आवेदन तीन अलग-अलग श्रेणियों के नागरिकों से आए हैं, जिन्हें आगामी चुनाव से पहले वोटर लिस्ट में शामिल करने की प्रक्रिया शुरू की गई है।
किन लोगों को दिया जा रहा है फॉर्म-6
पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय के मुताबिक, फॉर्म-6 तीन कैटेगरी के लोगों को दिया जा रहा है। पहली श्रेणी में वे युवा मतदाता शामिल हैं, जिन्होंने पहली जनवरी तक 18 साल की उम्र पूरी कर ली है। दूसरी श्रेणी में वे लोग हैं, जिनका नाम पहले एडीएस यानी ‘अनमैप्ड वोटर्स’ की सूची में था और बाद में मतदाता सूची से हट गया। तीसरी श्रेणी में वे नागरिक हैं, जिनका नाम 2025 की वोटर लिस्ट में दर्ज नहीं है।
अब तक कितने आवेदन आए
आयोग के आंकड़ों के मुताबिक, इन तीनों श्रेणियों को मिलाकर अब तक कुल 3 लाख 13 हजार फॉर्म-6 जमा किए जा चुके हैं। चुनाव आयोग के सूत्रों का कहना है कि यह संख्या आने वाले दिनों में और बढ़ सकती है, क्योंकि SIR से जुड़ी नोटिस और सुनवाई की प्रक्रिया अभी जारी है।
हियरिंग के बाद ही जुड़ेगा नाम
चुनाव आयोग ने साफ किया है कि केवल फॉर्म-6 भरने से ही किसी का नाम मतदाता सूची में नहीं जोड़ा जाएगा। आयोग के सूत्रों के अनुसार, सभी आवेदकों को हियरिंग के लिए बुलाया जाएगा। सुनवाई के दौरान संबंधित अधिकारी दस्तावेजों की जांच करेंगे और पूरी तरह संतुष्ट होने के बाद ही नए मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट में शामिल किए जाएंगे।
बंगाल चुनाव से जुड़ी अहम कड़ी
राज्य में SIR प्रक्रिया, नोटिस, सुनवाई और अब बड़ी संख्या में फॉर्म-6 दाखिल होना आगामी चुनावों के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है। चुनाव आयोग का दावा है कि इस पूरी प्रक्रिया का मकसद मतदाता सूची को पारदर्शी और त्रुटिरहित बनाना है, ताकि बंगाल चुनाव में केवल पात्र मतदाता ही अपने मताधिकार का इस्तेमाल कर सकें।
टिकीं सियासी निगाहें
मतदाता सूची में हो रहे बदलावों पर सत्तारूढ़ और विपक्षी दलों की नजर भी बनी हुई है। आने वाले दिनों में यह प्रक्रिया किस हद तक तेज होती है और कितने नए नाम अंतिम सूची में जुड़ते हैं, यह बंगाल की चुनावी राजनीति के लिए निर्णायक साबित हो सकता है।