मुख्य चुनाव अधिकारी कार्यालय परिसर में संवाददाताओं के संबोधित करते तृणमूल के नेता पार्थ भौमिक, महुआ मोइत्रा, चंद्रीमा भट्टाचार्य, ब्रात्य बसु और प्रतिमा मंडल मुख्य चुनाव अधिकारी कार्यालय परिसर में संवाददाताओं के संबोधित करते तृणमूल के नेता पार्थ भौमिक, महुआ मोइत्रा, चंद्रीमा भट्टाचार्य, ब्रात्य बसु और प्रतिमा मंडल
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रोल ऑब्जर्वर की भूमिका पर TMC ने उठाया कानूनी सवाल

मतदाता सूची संशोधन को लेकर लगाया गंभीर आरोप व्हाट्सऐप निर्देश और पोर्टल गड़बड़ी से चुनाव प्रक्रिया हुई विवादित

केडी पार्थ, सन्मार्ग संवाददाता

कोलकाता : पश्चिम बंगाल में चल रहे स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के बीच चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता और निष्पक्षता पर नया विवाद खड़ा हो गया है। तृणमूल कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि माइक्रो-ऑब्जर्वरों को अनौपचारिक व्हाट्सऐप ग्रुप के माध्यम से ऐसे निर्देश दिए गए जो कानूनी प्रावधानों और सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के विपरीत हैं। साथ ही ECINET पोर्टल में तकनीकी गड़बड़ियों और लॉगिन क्रेडेंशियल के कथित दुरुपयोग से हजारों मतदाताओं के दस्तावेज प्रभावित होने का दावा किया गया है। इस मुद्दे पर सांसद पार्थ भौमिक, सांसद महुआ मोइत्रा, मंत्री चंद्रीमा भट्टाचार्य, सांसद प्रतिमा मंडल और मंत्री ब्रात्य बसु ने पश्चिम बंगाल के मुख्य चुनाव अधिकारी मनोज अग्रवाल को ज्ञापन सौंपकर तत्काल हस्तक्षेप और उचित कार्रवाई की मांग की है।

व्हाट्सऐप ग्रुप के जरिए ‘गैर-कानूनी’ निर्देश का आरोप

प्रतिनिधियों का आरोप है कि विशेष रोल ऑब्जर्वर के रूप में तैनात सी. मुरुगन द्वारा माइक्रो-ऑब्जर्वरों के लिए व्हाट्सऐप ग्रुप बनाकर ग्राम पंचायतों द्वारा जारी जन्म प्रमाणपत्र स्वीकार न करने के निर्देश दिए गए। जबकि ECI की गाइडलाइंस और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार, चुनावी प्रक्रिया से जुड़े आदेश औपचारिक माध्यम से जारी होने चाहिए। कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में पंचायतें जन्म पंजीकरण की वैध प्राधिकृत संस्था हैं, इसलिए ऐसे प्रमाणपत्रों को अस्वीकार करना नियमों के विपरीत हो सकता है।

माइक्रो-ऑब्जर्वर की भूमिका पर भ्रम

9 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट द्वारा स्पष्ट किए गए दायरे के बावजूद, आरोप है कि माइक्रो-ऑब्जर्वरों को मतदाता पात्रता पर निर्णय लेने जैसे अधिकारिक कार्यों में अप्रत्यक्ष रूप से शामिल किया जा रहा है। जबकि उनकी भूमिका केवल सहायक और रिपोर्टिंग तक सीमित बताई गई है।

लॉगिन क्रेडेंशियल के दुरुपयोग का दावा

प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह भी आरोप लगाया गया कि कुछ जिला पर्यवेक्षकों के लॉगिन का उपयोग कर रातों-रात हजारों नामों को ‘वेरिफिकेशन’ के लिए वापस भेजा गया, खासकर अल्पसंख्यक बहुल इलाकों में। टावर लोकेशन मिलान के आधार पर लॉगिन उपयोग की जांच की मांग की गई है। यदि यह सही पाया जाता है, तो यह गंभीर प्रशासनिक उल्लंघन माना जाएगा।

ECINET पोर्टल में तकनीकी गड़बड़ी

आरोपों के अनुसार, ECINET पोर्टल बार-बार तकनीकी समस्याओं से जूझता रहा है। कई मामलों में अपलोड किए गए दस्तावेज दिखाई नहीं दे रहे, जिसके चलते आवेदनों को “दस्तावेज न मिलने” के आधार पर खारिज कर दिया गया। दावा है कि लगभग 1.14 लाख दस्तावेज समय पर अपलोड नहीं हो पाए।

औपचारिक जांच और पारदर्शिता की मांग

प्रतिनिधिमंडल ने इन सभी मामलों में त्वरित औपचारिक जांच, स्पष्ट ऑपरेशनल गाइडलाइंस और तकनीकी ऑडिट की मांग की है। उनका कहना है कि मतदाता सूची संशोधन प्रक्रिया की निष्पक्षता और वैधता पर जनता का भरोसा बनाए रखने के लिए तत्काल सुधारात्मक कदम आवश्यक हैं।

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