निधि, सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : पश्चिम बंगाल के करीब छह करोड़ राशनकार्ड धारकों के लिए दिसंबर 2026 से राशन में चावल और गेहूं का अनुपात बदलने जा रहा है। केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (एनएफएसए) के तहत राज्य के खाद्यान्न आवंटन में बदलाव को मंजूरी दी है। इसके तहत राशन में चावल की मात्रा बढ़ेगी, जबकि गेहूं का कोटा घटेगा। राज्य सरकार ने बंगाल में चावल की अधिक मांग का हवाला देते हुए केंद्र से आवंटन अनुपात बदलने का अनुरोध किया था। इसके बाद केंद्र ने दिसंबर 2025 में लागू 2:3 के गेहूं-चावल अनुपात को बहाल करने का फैसला किया है।
पीएचएच और अंत्योदय श्रेणी के राशन में होगा बदलाव
नई व्यवस्था के तहत प्राथमिकता वाले परिवारों (पीएचएच) को हर महीने प्रति व्यक्ति पांच किलो खाद्यान्न मिलता रहेगा। हालांकि, इसमें अब दो किलो के बजाय तीन किलो चावल और दो किलो गेहूं दिया जाएगा। पहले इस श्रेणी में दो किलो चावल और तीन किलो गेहूं मिलता था। वहीं, अंत्योदय अन्न योजना (एएवाई) के तहत आने वाले परिवारों को मिलने वाले 35 किलो खाद्यान्न में अब 20 किलो चावल और 15 किलो गेहूं शामिल होगा। पहले इन परिवारों को 15 किलो चावल और 20 किलो गेहूं मिलता था। इस तरह कुल खाद्यान्न की मात्रा में बदलाव किए बिना चावल की हिस्सेदारी बढ़ाई जाएगी।
केंद्र का सब्सिडी खर्च बढ़ेगा, किसानों को मिल सकता है फायदा
चावल की खरीद पर गेहूं की तुलना में अधिक खर्च होने के कारण इस फैसले का आर्थिक असर भी पड़ेगा। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, केंद्र सरकार को एक किलो गेहूं की खरीद पर 29.80 रुपये, जबकि एक किलो चावल पर 41.73 रुपये खर्च करने पड़ते हैं। ऐसे में चावल का आवंटन बढ़ने से केंद्र के सब्सिडी खर्च में सालाना करीब 100 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी होने का अनुमान है। दूसरी ओर, राशन में चावल की बढ़ती जरूरत पूरी करने के लिए राज्य में धान की खरीद बढ़ सकती है। इससे स्थानीय किसानों को अपनी उपज बेचने के अधिक अवसर मिलने और लाभकारी मूल्य प्राप्त करने में मदद मिल सकती है।