केडी पार्थ, सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : पश्चिम बंगाल में वर्षों से जमीन अधिग्रहण और प्रशासनिक अड़चनों के कारण रुकी रेलवे परियोजनाओं को अब नई रफ्तार मिलने जा रही है। मुख्यमंत्री Suvendu Adhikari ने शनिवार को राज्य के सभी संबंधित विभागों को निर्देश दिया कि लंबित रेलवे परियोजनाओं के लिए जरूरी जमीन जल्द रेलवे अधिकारियों को सौंप दी जाए। राज्य में कुल 61 रेलवे और मेट्रो परियोजनाएं लंबे समय से विभिन्न कारणों से अटकी हुई थीं। सरकार का दावा है कि अब “डबल इंजन” समन्वय के जरिए इन परियोजनाओं को तेज गति से पूरा किया जाएगा।
बॉर्डर इलाकों की परियोजनाओं को प्राथमिकता
राज्य सरकार ने भारत-बांग्लादेश सीमा से जुड़े रेलवे और इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को प्राथमिकता देने का फैसला किया है। उत्तर दिनाजपुर जिले के हिली क्षेत्र में रेलवे परियोजना लंबे समय से जमीन विवाद के कारण प्रभावित थी। अब प्रशासनिक स्तर पर जमीन हस्तांतरण की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। सरकार का मानना है कि सीमा क्षेत्रों में रेलवे कनेक्टिविटी मजबूत होने से व्यापार, सुरक्षा और आवागमन को बड़ा लाभ मिलेगा। इसके अलावा सीमावर्ती इलाकों में बुनियादी ढांचे के विकास को भी गति मिलेगी।
नंदीग्राम रेल लाइन परियोजना को फिर मिलेगी गति
पूर्व मेदिनीपुर के नंदीग्राम इलाके में देशप्राण-नंदीग्राम नई रेल लाइन परियोजना भी लंबे समय से अटकी हुई थी। वर्ष 2009-10 में स्वीकृत इस परियोजना को जमीन अधिग्रहण की समस्याओं के कारण आगे नहीं बढ़ाया जा सका था। अब राज्य सरकार ने संकेत दिए हैं कि इस परियोजना पर भी तेजी से काम शुरू कराया जाएगा।
न्यू गरिया-एयरपोर्ट मेट्रो कॉरिडोर को मिली मंजूरी
कोलकाता के न्यू गरिया-एयरपोर्ट मेट्रो कॉरिडोर पर भी निर्माण कार्य अब तेज हो गया है। चिंगड़ीघाटा क्रॉसिंग पर 366 मीटर लंबे वायाडक्ट का काम एक वर्ष से अधिक समय तक पुलिस अनुमति और प्रशासनिक मंजूरी के अभाव में रुका हुआ था। मुख्यमंत्री ने कहा कि 9 मई को नई सरकार बनने के बाद सभी आवश्यक मंजूरियां दे दी गईं, जिसके बाद निर्माण कार्य पूरी रफ्तार से आगे बढ़ रहा है।
इन प्रमुख परियोजनाओं पर सरकार का फोकस
राज्य और रेल मंत्रालय जिन महत्वपूर्ण परियोजनाओं को प्राथमिकता दे रहे हैं, उनमें शामिल हैं —
-तारकेश्वर-बिष्णुपुर नई रेल लाइन
-देशप्राण-नंदीग्राम रेल लाइन
-नैहाटी-रानाघाट तीसरी लाइन
-चांदिल-अनारा-बर्नपुर तीसरी लाइन
-शिवोक-रंगपो नई लाइन
-कल्याणी-बंदीपुर नई लाइन
-नवद्वीपघाट-नवद्वीपधाम रेल लाइन
-सैंथिया बाइपास परियोजना
-न्यू गरिया-एयरपोर्ट मेट्रो कॉरिडोर
इनमें से कई परियोजनाएं वर्षों से भूमि अधिग्रहण, कानून-व्यवस्था और प्रशासनिक अनुमति की समस्याओं से प्रभावित थीं।
92 हजार करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाएं जारी
रेल मंत्री Ashwini Vaishnaw पहले ही जानकारी दे चुके हैं कि पश्चिम बंगाल में लगभग 92,974 करोड़ रुपये की रेलवे और मेट्रो परियोजनाओं पर काम चल रहा है। इनमें नई रेल लाइनें, स्टेशन पुनर्विकास, मल्टी-ट्रैकिंग और सुरक्षा सुधार से जुड़ी योजनाएं शामिल हैं।
जमीन अधिग्रहण बनी सबसे बड़ी चुनौती
रेल मंत्रालय के अनुसार, कई परियोजनाओं के लिए आवश्यक जमीन का बड़ा हिस्सा अब तक रेलवे को नहीं मिल पाया था। रिपोर्टों के मुताबिक कई परियोजनाओं में केवल सीमित भूमि ही उपलब्ध हो सकी थी, जिससे वर्षों तक निर्माण कार्य प्रभावित रहा। अब राज्य सरकार के सक्रिय हस्तक्षेप से जमीन आवंटन प्रक्रिया में तेजी आने की उम्मीद है।
“डबल इंजन सरकार” पर BJP का जोर
मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकारों के बीच बेहतर समन्वय से विकास परियोजनाओं को गति मिलेगी। उन्होंने दावा किया कि “डबल इंजन सरकार” के सहयोग से बंगाल में रेलवे, मेट्रो और आधारभूत संरचना परियोजनाओं का काम पहले की तुलना में कहीं अधिक तेजी से पूरा होगा। उन्होंने कहा कि विकसित भारत का लक्ष्य तभी पूरा होगा, जब पश्चिम बंगाल भी तेज विकास की राह पर आगे बढ़ेगा।