CEO और जिलास्तरीय अधिकारी कोर्ट की डेडलाइन का पालन करने को जुटे काम में
केडी पार्थ, सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : सुप्रीम कोर्ट के आदेश के तहत पश्चिम बंगाल में लगभग 1.36 करोड़ मतदाताओं की “लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी” वाली सूची शनिवार, 24 जनवरी को पब्लिश की जाएगी। इसमें पिता-माता के नाम और उम्र में विसंगतियों, दादा-दादी की उम्र में असंगति, छह से अधिक संतान वाले रिकॉर्ड जैसी गड़बड़ियां शामिल हैं। इसके अलावा ‘नो-मैपिंग’ वोटर्स की सूची भी जारी होगी। राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) और जिलास्तरीय अधिकारी, AERO & BLO तेजी से काम कर रहे हैं ताकि सुप्रीम कोर्ट की डेडलाइन का पालन हो सके।
लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी क्या है
सुप्रीम कोर्ट ने तीन श्रेणियों में मतदाताओं को बांटा है:
-मैप्ड: 2002 के SIR से जुड़े मतदाता
-अनमैप्ड: 2002 SIR से लिंक नहीं
-लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी: करीब 1.36 करोड़ मतदाता
इस श्रेणी में पिता या माता के नाम में अंतर, माता-पिता की उम्र में असंगति, दादा-दादी की उम्र में विसंगति और छह से अधिक संतान वाले रिकॉर्ड शामिल हैं।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश
लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी वाले मतदाताओं की सूची ग्राम पंचायत भवन, तालुका/ब्लॉक कार्यालय और शहरी वार्ड कार्यालयों में प्रदर्शित की जाएगी।
नो-मैपिंग वोटर्स की स्थिति
कुल 31.68 लाख नो-मैपिंग वोटर्स है। आयोग के नियमों के अनुसार, सुनवाई में न आने वाले वोटर्स के नाम फाइनल लिस्ट से हटा दिए जाएंगे। सुनवाई का आखिरी दिन 7 फरवरी है और फाइनल लिस्ट 14 फरवरी को पब्लिश की जाएगी।
आगे की कार्रवाई
यदि कोई वोटर बाद में सुनवाई में भाग लेना चाहे, तो आयोग उसे मौका देगा। हाला॒कि, नियमों के तहत सुनवाई में न आने वाले नाम हटा दिए जाएंगे। इससे चुनावी तैयारी और वोटर सूची की सटीकता सुनिश्चित होगी।