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खाद्य सुरक्षा में पश्चिम बंगाल ने पेश की मिसाल !

तकनीक और भंडारण में बंगाल अव्वल

निधि, सन्मार्ग संवाददाता

कोलकाता : पश्चिम बंगाल सरकार ने खाद्य सुरक्षा के क्षेत्र में तकनीक और प्रबंधन का ऐसा तालमेल बिठाया है कि आज राज्य पूरे देश के लिए एक रोल मॉडल बनकर उभरा है। बजट 2026 के आंकड़ों के अनुसार, राज्य ने न केवल वितरण प्रणाली को पारदर्शी बनाया है, बल्कि अनाज भंडारण की क्षमता में भी ऐतिहासिक वृद्धि दर्ज की है। पश्चिम बंगाल ने खाद्यान्न वितरण में धोखाधड़ी और लीकेज को रोकने के लिए तकनीक का बेहतरीन इस्तेमाल किया है। राज्य के 98.90% राशन कार्ड सफलतापूर्वक आधार से लिंक किए जा चुके हैं। ई-पोस (ePoS) के माध्यम से होने वाले कुल लेनदेन का 99.98% हिस्सा आधार प्रमाणित है। यह आंकड़ा देश में सर्वाधिक है, जो सुनिश्चित करता है कि राशन सही हकदार तक ही पहुंच रहा है। राज्य ने 98.50% लाभार्थियों का ई-केवाईसी पूरा कर लिया है, जो डिजिटल गवर्नेंस में एक बड़ी उपलब्धि है।

धान खरीद में MSP और लक्ष्य दोनों बढ़े

वहीं राज्य की अनाज भंडारण क्षमता में पिछले 15 वर्षों में जो बदलाव आया है, वह क्रांतिकारी है। वर्ष 2011 से पहले बंगाल की भंडारण क्षमता मात्र 63,000 मीट्रिक टन थी, जो अनाज की सुरक्षा के लिहाज से बेहद कम थी। अब बुनियादी ढांचे में भारी निवेश के बाद इसे बढ़ाकर अब 11.83 लाख मीट्रिक टन (LMT) कर दिया गया है। हाल ही में पूर्व बर्दमान और झाड़ग्राम जिलों में 8,000 मीट्रिक टन की अतिरिक्त क्षमता जोड़ी गई है। किसानों के हित में सरकार ने खरीफ विपणन सत्र 2025-26 के लिए धान खरीद का लक्ष्य बढ़ाकर 67 लाख मीट्रिक टन कर दिया है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) को 2,300 रुपये से बढ़ाकर 2,369 रुपये प्रति क्विंटल कर दिया गया है। पारदर्शी खरीद के लिए ई-पैडी पोर्टल और वॉट्सएप चैटबॉट जैसी तकनीक का उपयोग किया जा रहा है, जिससे किसान अपनी सुविधा अनुसार बिक्री का समय तय कर सकते हैं।

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