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बंगाल चुनाव से पहले वोटर लिस्ट प्रक्रिया अटकी, तारीख बदलने के संकेत

मतदाता सूची वेरिफिकेशन में देरी, फाइनल लिस्ट पर चुनावी असर संभव चुनाव आयोग की तैयारी पर उठा सवाल वेरिफिकेशन और हियरिंग में देरी से बढ़ी चुनाव आयोग की चिंता

केडी पार्थ, सन्मार्ग संवाददाता

कोलकाता : आगामी पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले मतदाता सूची को लेकर बड़ी चुनौती सामने आ गई है। राज्य के कई जिलों में वोटर लिस्ट वेरिफिकेशन और हियरिंग का काम तय समय पर पूरा नहीं हो पाने के कारण फाइनल वोटर लिस्ट जारी होने की तारीख आगे बढ़ सकती है। राज्य के मुख्य चुनाव अधिकारी (सीईओ) मनोज अग्रवाल ने शुक्रवार को इसकी पुष्टि की।

चार जिलों के कुछ इलाकों में अब भी काम अधूरा

मनोज अग्रवाल ने बताया कि राज्य की 294 विधानसभा क्षेत्रों में से अधिकांश में वेरिफिकेशन और हियरिंग की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, लेकिन उत्तर कोलकाता, मालदह, दक्षिण चौबीस परगना और दार्जिलिंग जिले के कुछ विधानसभा क्षेत्रों में अब भी काम बाकी हैं। इन जिलों के जिला निर्वाचन अधिकारियों (डीईओ) से विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई है।

7 फरवरी की समय सीमा, 14 फरवरी पर संशय

सीईओ के अनुसार, मतदाता सूची वेरिफिकेशन और हियरिंग के लिए अंतिम तिथि 7 फरवरी तय की गई थी, लेकिन कुछ जिलों में प्रशासनिक और व्यावहारिक कारणों से प्रक्रिया में देरी हुई। इस कारण 14 फरवरी को फाइनल वोटर लिस्ट जारी करना फिलहाल संभव नहीं दिख रहा है। जरूरत पड़ने पर फाइनल सूची जारी करने की तारीख में बदलाव किया जा सकता है।

डीईओ की मांग पर मिलेगा अतिरिक्त समय

मनोज अग्रवाल ने बताया कि यदि संबंधित डीईओ लिखित रूप से समय बढ़ाने की मांग करते हैं, तो राज्य चुनाव कार्यालय चुनाव आयोग से कम से कम तीन दिन का अतिरिक्त समय मांगेगा। खासकर उत्तर कोलकाता की सात विधानसभा क्षेत्रों में से चार में वेरिफिकेशन का काम अपेक्षाकृत धीमा रहा है, जहां 2–3 दिन का अतिरिक्त समय दिया जा सकता है।

उत्तर कोलकाता की तीन सीटों पर काम पूरा

सूत्रों के अनुसार, उत्तर कोलकाता के काशीपुर-बेलगछिया, श्यामपुकुर और मानिकतला विधानसभा क्षेत्रों में हियरिंग और वेरिफिकेशन की प्रक्रिया पूरी कर ली गई है, जबकि अन्य सीटों पर काम अंतिम चरण में है।

कर्सियांग में विशेष कैंप की तैयारी

सीईओ ने यह भी बताया कि दार्जिलिंग जिले के कर्सियांग क्षेत्र में मिशनरी और चाय श्रमिकों के लिए विशेष कैंप लगाए जाएंगे। इसके लिए स्थानीय जिलाधिकारी ने अनुमति मांगी है, ताकि वंचित और दूरदराज के मतदाता भी चुनावी प्रक्रिया में शामिल हो सकें।

आरपीओ में लंबित आवेदन भी चुनौती

इसके अलावा क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय (आरपीओ) में 940 आवेदन फिलहाल पेंडिंग हैं, जिन्हें जल्द निपटाने का निर्देश दिया गया है। अनुमान है कि आगे करीब दो हजार और आवेदन आ सकते हैं। चुनाव आयोग इन सभी प्रक्रियाओं को जल्द पूरा कर चुनाव से पहले मतदाता सूची को अंतिम रूप देने की कोशिश में जुटा है।

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