केडी पार्थ, सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : राज्य सरकार ग्रामीण और दूरदराज क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रही है। स्वास्थ्य मंत्री शारद्वत मुखर्जी ने घोषणा की है कि राज्यभर में 200 नए ‘आयुष्मान आरोग्य मंदिर’ स्थापित किए जाएंगे। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि लोगों को प्राथमिक और माध्यमिक स्तर की बेहतर चिकित्सा सुविधाएं अपने इलाके में ही उपलब्ध हों और इलाज के लिए बड़े शहरों या जिला मुख्यालयों पर निर्भरता कम हो।
स्वास्थ्य सेवाओं में होगा बड़ा बदलाव
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, नए आरोग्य मंदिर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र स्तर पर विकसित किए जाएंगे। इन केंद्रों में आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं के साथ मरीजों के लिए बेड की व्यवस्था भी होगी। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच और गुणवत्ता दोनों में सुधार होगा।
जिले और महानगरों पर निर्भरता होगी कम
वर्तमान में कई मरीजों को सीटी स्कैन, अल्ट्रासाउंड और अन्य आवश्यक जांचों के लिए जिला अस्पतालों या कोलकाता जैसे बड़े शहरों का रुख करना पड़ता है। नई योजना का उद्देश्य स्थानीय स्तर पर ही ऐसी सुविधाएं उपलब्ध कराना है ताकि समय और खर्च दोनों की बचत हो सके।
डायग्नोस्टिक सुविधाओं का होगा विस्तार
सरकार ब्लॉक अस्पतालों में बेड बढ़ाने के साथ एक्स-रे, अल्ट्रासोनोग्राफी, पैथोलॉजिकल जांच और अन्य डायग्नोस्टिक सेवाओं का विस्तार करेगी। साथ ही सभी उप-मंडलीय अस्पतालों में चरणबद्ध तरीके से सीटी स्कैन सेवाएं शुरू करने की योजना है।
गांव-शहर के स्वास्थ्य अंतर को पाटने की पहल
विशेषज्ञों का मानना है कि स्वास्थ्य सेवाओं के विकेंद्रीकरण से ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच की खाई कम होगी। आरोग्य मंदिर परियोजना को इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।