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विवेकानंद जयंती: युवाओं के लिए प्रेरणा का संदेश

सन्मार्ग संवाददाता

कोलकाता : राज्यभर में सोमवार को स्वामी विवेकानंद की जयंती श्रद्धा, उत्साह और प्रेरणादायक कार्यक्रमों के साथ मनाई गई। इस अवसर पर विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों, सामाजिक संगठनों, युवा मंचों और आध्यात्मिक संस्थाओं द्वारा संगोष्ठी, विचार गोष्ठी, योग शिविर, भाषण प्रतियोगिता और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। स्वामी विवेकानंद की जयंती को राष्ट्रीय युवा दिवस के रूप में भी मनाया जाता है, जिसका उद्देश्य युवाओं को उनके आदर्शों से प्रेरित करना है। इस मौके पर गणमान्य व्यक्तियों ने स्वामी विवेकानंद को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि उनका जीवन दर्शन आज भी युवाओं के लिए मार्गदर्शक है। नेताओं ने कहा कि स्वामी विवेकानंद ने भारत की आध्यात्मिक शक्ति को विश्व पटल पर स्थापित किया और युवाओं में आत्मविश्वास, राष्ट्रभक्ति और सेवा भाव का संचार किया। कोलकाता स्थित बेलूर मठ में विशेष पूजा-अर्चना, ध्यान सत्र और प्रवचन का आयोजन किया गया। मठ परिसर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे और स्वामी विवेकानंद के आदर्शों को आत्मसात करने का संकल्प लिया। विभिन्न स्कूलों और कॉलेजों में विद्यार्थियों ने उनके प्रसिद्ध विचारों पर भाषण दिए, जिनमें “उठो, जागो और लक्ष्य प्राप्ति तक रुको मत” जैसे प्रेरक संदेश विशेष रूप से चर्चा में रहे।

स्वामी विवेकानंद का जन्म 12 जनवरी 1863 को कोलकाता में हुआ था। वे महान संत रामकृष्ण परमहंस के शिष्य थे और उन्होंने भारतीय दर्शन, वेदांत और योग को पश्चिमी देशों तक पहुंचाया। वर्ष 1893 में शिकागो में आयोजित विश्व धर्म संसद में उनके ऐतिहासिक भाषण ने भारत को वैश्विक पहचान दिलाई। उन्होंने मानव सेवा को ही ईश्वर सेवा माना और सामाजिक कुरीतियों के विरुद्ध आवाज उठाई।

युवा संगठनों द्वारा आयोजित कार्यक्रमों में स्वामी विवेकानंद के विचारों को आज की चुनौतियों से जोड़ते हुए बताया गया कि उनका संदेश न केवल आध्यात्मिक उन्नति, बल्कि सामाजिक और राष्ट्रीय विकास के लिए भी अत्यंत प्रासंगिक है। वक्ताओं ने कहा कि यदि युवा उनके बताए मार्ग पर चलें तो एक सशक्त, आत्मनिर्भर और समरस भारत का निर्माण संभव है। स्वामी विवेकानंद जयंती के अवसर पर देशभर में यह संदेश गूंजता रहा कि युवा शक्ति ही राष्ट्र की असली पूंजी है, और इसी शक्ति को सही दिशा देना स्वामी विवेकानंद का सबसे बड़ा योगदान है।

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