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उत्तराखंड में 169 सेंसर से भूकंप की जल्द चेतावनी, 500 तक बढ़ाने की योजना

EEWS से आपदा सुरक्षा मजबूत, कठिन भौगोलिक स्थिति के कारण कुछ सेंसर अस्थायी रूप से बंद

उत्तराखंड सरकार ने गुरुवार को विधानसभा को बताया कि राज्य में भूकंप का पूर्व चेतावनी प्रणाली (Earthquake Early Warning System) के तहत अब तक 169 सेंसर स्थापित किए गए हैं। ये सेंसर भूकंप का पता लगाने और तुरंत अलर्ट जारी करने में सक्षम हैं।

हालांकि, राज्य की कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और कुछ सेंसर के दूरदराज के स्थानों के कारण बिजली कटौती से अस्थायी सिग्नल बाधा आती है, जिससे 41 सेंसर इस समय काम नहीं कर रहे हैं। शेष 128 सेंसर सक्रिय हैं और मरम्मत के दौरान संख्या बढ़ती या घटती रहती है, विधानसभा में पार्षद Subodh Uniyal ने बताया।

सेंसरों की देखभाल के लिए Indian Institute of Technology Roorkee की तकनीकी टीम लगातार काम कर रही है। सरकार ने बताया कि वर्तमान में इन सेंसरों की स्थापना में लगभग ₹115 करोड़ खर्च हुए हैं।

भूकंप जोखिम घटाने के राष्ट्रीय कार्यक्रम (National Earthquake Risk Mitigation Programme) के तहत सरकार का लक्ष्य सेंसरों की संख्या बढ़ाकर 500 करना है। यह अतिरिक्त सेंसर प्रमुख फॉल्ट जोन जैसे कि हिमालयन फ्रंटल थ्रस्ट (HFT), मेन बाउंड्री थ्रस्ट (MBT), और मेन सेंट्रल थ्रस्ट (MCT) तथा उत्तराखंड–नेपाल और हिमाचल–उत्तराखंड सीमावर्ती संवेदनशील क्षेत्रों में लगाए जाएंगे।

अधिकारियों ने बताया कि सेंसरों के सटीक स्थान भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण के बाद तय किए जाएंगे। प्रस्तावित विस्तार पर ₹153.44 करोड़ का अनुमानित खर्च आएगा, जिसमें 90:10 के अनुपात में फंडिंग की जाएगी।

उत्तराखंड को भारतीय मानक IS 1893:2025 के अनुसार भूकंप जोन 6 में शामिल किया गया है, जो उच्च भूकंपीय संवेदनशीलता को दर्शाता है। फरवरी में राज्य ने उच्च जोखिम वाले भूकंप वर्गीकरण के मद्देनजर निर्माण नियमों में संशोधन के लिए 14 सदस्यीय पैनल का गठन किया।

आपदा प्रबंधन सचिव Vinod Kumar Suman ने कहा कि राज्य का उद्देश्य केवल नियमों में बदलाव नहीं है, बल्कि सुरक्षित निर्माण की व्यापक संस्कृति को बढ़ावा देना भी है।

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