गैस की कमी से यूरिया प्लांट में उत्पादन कम हो रहा है ( फाइल फोटो )। 
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गैस संकट से आधे पर यूरिया संयंत्र

पश्चिम एशिया संकट के बीच ‘अपरिहार्य स्थिति’ की घोषणा के चलते तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) की आपूर्ति बाधित होने की वजह से देश के यूरिया संयंत्र अपनी आधी क्षमता पर परिचालन कर रहे हैं।

नई दिल्लीः पश्चिम एशिया संकट के बीच ‘अपरिहार्य स्थिति’ की घोषणा के चलते तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) की आपूर्ति बाधित होने की वजह से देश के यूरिया संयंत्र अपनी आधी क्षमता पर परिचालन कर रहे हैं। सूत्रों ने बताया कि देश की सबसे बड़ा एलएनजी प्राप्त करने वाला टर्मिनल चलाने वाली पेट्रोनेट एलएनजी लि. ने अपरिहार्य स्थिति की घोषणा की है। आपूर्तिकर्ताओं ने जलडमरूमध्य व्यवधान की वजह से कंपनी को अनुबंधित मात्रा में गैस की आपूर्ति करने में असमर्थता जताई है।

इस कदम से सरकारी गैस वितरक कंपनियों गेल (इंडिया) लिमिटेड, इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन लिमिटेड (आईओसी) और भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लि. (बीपीसीएल) ने आपूर्ति में कटौती शुरू कर दी है। ये कंपनियां रासगैस अनुबंध के तहत उर्वरक इकाइयों को गैस की आपूर्ति करती हैं।

उर्वरक कंपनियों के अधिकारियों का कहना है कि परिचालन में समन्वय भी टूट गया है, जिससे स्थिति और खराब हो गई है।

उद्योग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘‘गैस आपूर्ति सामान्य स्तर से घटाकर 60-65 प्रतिशत तक कर कर दी गई है। उन्होंने कहा कि कुछ इकाइयों के लिए प्रभावी आपूर्ति 50 प्रतिशत से नीचे आ गई है। इस वजह से, जिन संयंत्रों पर असर पड़ा है, वहां यूरिया का उत्पादन लगभग 50 प्रतिशत कम हो गया है। संयंत्र अधिकारियों के मुताबिक, वहीं इसके उलट इन जगहों पर ऊर्जा की खपत की खपत 40 प्रतिशत तक बढ़ गई है, क्योंकि कम लोड पर चलने वाली बड़ी अमोनिया-यूरिया ट्रेन की तापीय दक्षता में भारी गिरावट आई है।

गैस आपूर्ति सामान्य स्तर से घटाकर 60-65 प्रतिशत तक कर कर दी गई है।

भारत एक प्रमुख यूरिया उत्पादक

एक संयंत्र के परिचालन प्रबंधक ने कहा, ‘‘इस पैमाने के संयंत्र अपनी मर्जी से उत्पादन बढ़ाने या घटाने के लिए डिजाइन नहीं किए गए हैं।’’ इन हालात में काम करने का मतलब है कि आप कम उर्वरक बनाने के लिए ज़्यादा ऊर्जा खर्च कर रहे हैं, और यह सीधे तौर पर वित्तीय नुकसान है। उर्वरक कंपनियों के अधिकारियों का कहना है कि परिचालन में समन्वय भी टूट गया है, जिससे स्थिति और खराब हो गई है।

उद्योग के एक अन्य सूत्र ने कहा कि इस तरह के अचानक लोड में बदलाव बड़ी ट्रेन-आधारित अमोनिया-यूरिया संयंत्रों के लिए व्यावहारिक रूप से मुमकिन नहीं हैं। विश्लेषकों का कहना है कि भारत दुनिया के सबसे बड़े यूरिया उपभोक्ताओं में से एक है, और लगातार घरेलू कमी आने वाले खरीफ बुवाई सत्र से पहले उर्वरक की उपलब्धता पर असर डाल सकती है। 19 मार्च तक, भारत के पास कुल 61.14 लाख टन यूरिया का भंडार था, जो एक साल पहले इसी अवधि के 55.22 लाख टन से ज्यादा है।

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