कोलकाता : ममता बनर्जी के कलकत्ता हाई कोर्ट में वकील की पोशाक पहनकर पेश होने के बाद विवाद और गहरा गया है। अब इस मामले में बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) ने दखल देते हुए पश्चिम बंगाल बार काउंसिल से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।
BCI ने राज्य बार काउंसिल को निर्देश दिया है कि वह ममता बनर्जी के वकील के रूप में नामांकन, उनकी प्रैक्टिस की स्थिति और सर्टिफिकेट ऑफ प्रैक्टिस (COP) की वैधता की पुष्टि करे। मीडिया रिपोर्ट्स के आधार पर परिषद ने कहा है कि किसी पूर्व मुख्यमंत्री का वकीलों के आधिकारिक परिधान में अदालत में पेश होना नियमों और पेशेवर आचरण के तहत जांच का विषय है।
दरअसल, हाल ही में ममता बनर्जी कलकत्ता हाई कोर्ट में वकील की ड्रेस में दिखाई दी थीं, जिसके बाद यह सवाल उठा कि क्या उन्होंने विधिवत एनरोलमेंट और प्रैक्टिस की अनुमति ले रखी है। नियमों के अनुसार केवल एलएलबी की डिग्री होना पर्याप्त नहीं है, बल्कि बार काउंसिल में पंजीकरण और वैध प्रैक्टिस सर्टिफिकेट जरूरी होता है।
BCI के नियम यह भी कहते हैं कि अगर कोई वकील संवैधानिक या लाभ के पद पर रहता है, तो उसे अपनी वकालत अस्थायी रूप से निलंबित करनी होती है। पद छोड़ने के बाद ही दोबारा प्रैक्टिस शुरू करने के लिए अनुमति लेनी होती है।
इसी के तहत BCI ने राज्य बार काउंसिल से कई अहम सवालों के जवाब मांगे हैं, जिनमें ममता बनर्जी का एनरोलमेंट नंबर, उनकी मौजूदा स्थिति, मुख्यमंत्री रहते हुए प्रैक्टिस का स्टेटस और क्या उन्होंने दोबारा प्रैक्टिस शुरू करने के लिए आवेदन किया है, जैसी जानकारियां शामिल हैं।
बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने 16 मई तक जवाब देने को कहा है और साथ ही निर्देश दिया है कि जांच पूरी होने तक किसी भी रिकॉर्ड में कोई बदलाव या छेड़छाड़ न की जाए। अब सभी की नजर पश्चिम बंगाल बार काउंसिल के जवाब पर टिकी है, जिससे साफ होगा कि ममता बनर्जी का अदालत में वकील के रूप में पेश होना नियमों के अनुरूप था या नहीं।