राजग के उम्मीदवार बी. गोपालकृष्णन ने कहा कि मैंने जनता की भावनाओं को प्रकट किया। 
टॉप न्यूज़

‘हिंदू विधायक’ टिप्पणी पर घमासान

केरल के त्रिशूर जिले के गुरुवायूर विधानसभा क्षेत्र में चुनावी माहौल के बीच एक कथित सांप्रदायिक टिप्पणी को लेकर विवाद गहराता जा रहा है।

त्रिशूर : केरल के त्रिशूर जिले के गुरुवायूर विधानसभा क्षेत्र में चुनावी माहौल के बीच एक कथित सांप्रदायिक टिप्पणी को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। कांग्रेस से संबद्ध छात्र संगठन केरल स्टूडेंट्स यूनियन ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नीत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के उम्मीदवार बी. गोपालकृष्णन के खिलाफ केरल हाई कोर्ट में याचिका दायर की है।

संगठन ने आरोप लगाया है कि उम्मीदवार के भाषण में सांप्रदायिक भावनाएं भड़काने का प्रयास किया गया, जिससे चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता प्रभावित हो सकती है।

यह विवाद एक चुनाव प्रचार वीडियो को लेकर शुरू हुआ, जो सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से प्रसारित हुआ। इस वीडियो में बी. गोपालकृष्णन कथित तौर पर यह कहते हुए दिखाई दे रहे हैं कि गुरुवायूर क्षेत्र में पिछले लगभग पांच दशकों से कोई “हिंदू विधायक” नहीं चुना गया है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि वाम मोर्चा और कांग्रेस-नीत यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूडीएफ) दोनों ने इस समुदाय से उम्मीदवार नहीं उतारे हैं। इसके अलावा, उन्होंने गुरुवायूर को एक अंतरराष्ट्रीय तीर्थ स्थल बताते हुए इसे “गुरुवायूरप्पन भगवान की भूमि” कहा और दावा किया कि यह क्षेत्र लंबे समय से “मंदिर चोरों” के हाथों में है। KSU का कहना है कि इस तरह की टिप्पणियां सीधे तौर पर मतदाताओं को धार्मिक आधार पर विभाजित करने का प्रयास हैं, जो चुनाव आचार संहिता और कानून दोनों का उल्लंघन करती हैं।

संगठन के त्रिशूर जिला अध्यक्ष गोकुल गुरुवायूर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक पर एक पोस्ट के जरिए जानकारी दी कि इस मामले में न केवल हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया गया है, बल्कि प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों को भी औपचारिक शिकायतें सौंपी गई हैं।

KSU ने उम्मीदवारी रद्द करने की मांग की

शिकायत में जिला कलेक्टर, जिला पुलिस प्रमुख, राज्य निर्वाचन प्राधिकरण और गुरुवायूर के सहायक पुलिस आयुक्त (ACP) से तत्काल कार्रवाई की मांग की गई है। KSU ने अपनी याचिका में यह अनुरोध किया है कि यदि आरोप सिद्ध होते हैं, तो संबंधित उम्मीदवार को अयोग्य घोषित किया जाए और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए। संगठन का यह भी कहना है कि चुनाव के दौरान इस प्रकार के बयान लोकतांत्रिक मूल्यों और सामाजिक सौहार्द के लिए खतरा हैं।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि केरल जैसे राज्य में, जहां धार्मिक सहिष्णुता और सामाजिक संतुलन की मजबूत परंपरा रही है, इस तरह के आरोप गंभीर राजनीतिक असर डाल सकते हैं। खासकर गुरुवायूर जैसे क्षेत्र में, जो धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है, ऐसे बयान संवेदनशीलता को और बढ़ा सकते हैं।हालांकि, इस पूरे मामले पर भाजपा उम्मीदवार बी. गोपालकृष्णन की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रशासन और न्यायालय इस मामले में क्या रुख अपनाते हैं, और क्या यह विवाद चुनावी परिदृश्य को प्रभावित करता है?

SCROLL FOR NEXT