नई दिल्ली: राज्यसभा में लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधन विधेयक, 2026 पर चर्चा के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली। केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने पूर्ववर्ती यूपीए सरकार पर राष्ट्रीय परीक्षा निकाय नहीं बनाने और पेपर लीक रोकने के लिए आवश्यक कदम नहीं उठाने का आरोप लगाया।
जितेंद्र सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार को यूपीए के अधूरे काम पूरे करने पड़े। उन्होंने दावा किया कि यूपीए सरकार ने परीक्षा प्रणाली में सुधार संबंधी महत्वपूर्ण सिफारिशों को नजरअंदाज किया था, जबकि मौजूदा सरकार ने परीक्षा व्यवस्था को सुरक्षित और पारदर्शी बनाने के लिए कई कदम उठाए हैं।
इस पर कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने पलटवार करते हुए जंतर-मंतर पर छात्रों के प्रदर्शन के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई का मुद्दा उठाया। उन्होंने गृह मंत्री अमित शाह से कार्रवाई पर जवाब देने की मांग करते हुए कहा कि यदि जवाब नहीं दिया जाता तो उन्हें इस्तीफा देना चाहिए।
खरगे ने आरोप लगाया कि सरकार छात्रों के बढ़ते विरोध को शांत करने के लिए कानून में संशोधन ला रही है, जबकि मूल समस्या के समाधान पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया।
विधेयक में पेपर लीक के मामलों में 10 साल तक की जेल और 50 लाख रुपये तक जुर्माने का प्रावधान किया गया है। परीक्षा संचालन से जुड़े सेवा प्रदाताओं के लिए अधिकतम जुर्माना 1 करोड़ से बढ़ाकर 5 करोड़ रुपये तथा सार्वजनिक परीक्षाएं आयोजित करने से प्रतिबंध की अवधि 4 वर्ष से बढ़ाकर 8 वर्ष करने का प्रस्ताव है।
सरकार ने कहा कि प्रधानमंत्री द्वारा गठित उच्चस्तरीय टास्क फोर्स की सिफारिशों पर तेजी से अमल किया जा रहा है, ताकि देश की परीक्षा प्रणाली को पूरी तरह 'लीक-प्रूफ' बनाया जा सके।