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अपर प्राइमरी : कहीं किताबें नहीं तो कहीं कक्षाएं रहीं खाली

तीन महीने का सिलेबस, किताबें नहीं मिलीं अभी तक

अपर प्राइमरी छात्रों के सामने बड़ी चुनौती

मुनमुन, सन्मार्ग संवाददाता

कोलकाता : राज्य के अपर प्राइमरी स्कूलों के हजारों छात्र इस समय गंभीर शैक्षणिक संकट का सामना कर रहे हैं। शैक्षणिक सत्र शुरू हुए 3 महीने बीत जाने के बाद भी कई स्कूलों में सरकारी पाठ्यपुस्तकें नहीं पहुंची हैं, जबकि परीक्षाएं अप्रैल में शुरू होने वाली हैं। ऐसे में छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों के बीच चिंता बढ़ती जा रही है कि इतनी कम अवधि में पूरा पाठ्यक्रम कैसे पूरा किया जाएगा। शिक्षा विभाग के नियमों के अनुसार, हर साल जनवरी के पहले कार्यदिवस पर ‘बुक डे’ मनाया जाता है। इसी दिन छात्रों को नई पाठ्यपुस्तकें वितरित की जानी चाहिए। इसके बाद महीने के पहले सप्ताह में ‘स्टूडेंट्स वीक’ का आयोजन होता है। हालांकि इस वर्ष कई जिलों से शिकायतें सामने आई हैं कि किताबों की आपूर्ति समय पर नहीं हो पाई।

आर्य परिषद विद्यालय में किताबें हैं, लेकिन कक्षाएं बाधित

दक्षिण 24 परगना जिले के कई स्कूलों में 16 मार्च तक भी सभी विषयों की किताबें नहीं पहुंची थीं। कृष्णचंद्रपुर हाई स्कूल के प्रधानाध्यापक चंदन माइती ने बताया कि कक्षा छह के छात्रों को अभी तक भूगोल की किताब नहीं मिली है। सोमवार सुबह विभाग से फोन आया और जल्द किताबें भेजने का आश्वासन दिया गया है लेकिन इतनी देर से किताबें मिलने पर छात्रों के लिए परीक्षा की तैयारी करना बेहद कठिन हो जाएगा। आर्य परिषद विद्यालय के प्रधानाध्यापक भगवानजी सिंह ने बताया कि अपर प्राइमरी की किताबें स्कूल में पर्याप्त मात्रा में मौजूद हैं लेकिन चुनाव ड्यूटी के कारण केन्द्रीय बलों ने स्कूल परिसर को अपने कब्जे में ले लिया है, जिससे नियमित कक्षाएं नहीं हो पा रही हैं और सभी छात्रों को किताबें वितरित नहीं की जा सकीं।

उत्तर बंगाल में भी यही हाल

उत्तर बंगाल के दक्षिण दिनाजपुर जिले में भी स्थिति चिंताजनक है। बरकाइल हाई स्कूल के प्रधानाध्यापक गौरांग दास ने बताया कि कक्षा पांच से आठ तक के लगभग 160 छात्रों को मार्च के तीसरे सप्ताह तक भी पाठ्यपुस्तकें नहीं मिली हैं। उन्होंने इस संबंध में विभाग को औपचारिक रूप से सूचना दे दी है। किताबों की कमी के कारण कुछ छात्र अपने सहपाठियों से नोट्स की नकल कर रहे हैं, जबकि कई छात्र ऊपरी कक्षाओं के विद्यार्थियों से किताबें उधार लेकर किसी तरह पढ़ाई जारी रखने की कोशिश कर रहे हैं। शिक्षकों का कहना है कि यदि जल्द समाधान नहीं निकला, तो छात्रों की पढ़ाई और परीक्षा दोनों प्रभावित हो सकती हैं।

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