मुनमुन, सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले के बाद राज्य के विभिन्न स्तरों पर कार्यरत शिक्षकों के लिए टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट (TET) की अनिवार्यता को लेकर गहरा असमंजस उत्पन्न हो गया है। 'बंगीय शिक्षक ओ शिक्षा-कर्मी समिति' के जनरल सेक्रेटरी स्वपन मंडल ने राज्य के स्कूल शिक्षा विभाग को पत्र लिखकर स्पष्ट निर्देश मांगे हैं। हालांकि शिक्षा विभाग ने स्कूल सर्विस कमीशन और प्राइमरी एजुकेशन बोर्ड को परीक्षा आयोजित करने का निर्देश दे दिया है, फिर भी राज्य के विभिन्न प्रकार के स्कूलों में काम करने वाले शिक्षकों पर इसके लागू होने को लेकर कोई साफ गाइडलाइन नहीं है। इस अस्पष्टता के कारण शिक्षकों में अपनी नौकरी की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता पैदा हो गई है, जिसके चलते संगठन ने विभाग से तुरंत औपचारिक जवाब देने और स्थिति साफ करने का आग्रह किया है।
7 महत्वपूर्ण मुद्दों पर स्पष्टता की मांग
संगठन ने अपनी चिट्ठी में 7 प्रमुख बिंदुओं पर स्थिति स्पष्ट करने को कहा है। इनमें मुख्य रूप से जूनियर हाई स्कूलों के पोस्ट-ग्रेजुएट शिक्षकों, नॉर्मल सेक्शन के ग्रेजुएट शिक्षकों तथा इंटीग्रेटेड हायर सेकेंडरी स्कूलों में कार्यरत शिक्षकों के लिए TET की जरूरत शामिल है। इसके अतिरिक्त, सामान्य सेक्शन के स्नातकोत्तर शिक्षकों, जूनियर हाई स्कूलों से इधर-उधर ट्रांसफर किए गए शिक्षकों और उन अभ्यर्थियों पर भी स्थिति साफ करने को कहा गया है जो पहले ही 90 अंक प्राप्त कर TET पास कर चुके हैं। संगठन चाहता है कि शिक्षा विभाग बिना देरी किए इन सभी सवालों के जवाब दे, ताकि शिक्षकों का यह असमंजस दूर हो सके।