निधि, सन्मार्ग संवाददाता
हावड़ा : देशभक्ति और त्योहारों के रंग में रंगने वाला उलूबेड़िया का बादामतला इन दिनों तिरंगे झंडों की तैयारी में व्यस्त है। संकरी गली के भीतर स्थित एक छोटी-सी फैक्ट्री में सुबह से देर रात तक झंडे बनाने का काम चल रहा है। लोग इस कारखाने के संचालक राजू हलदर को प्यार से ‘पताका मैन’ के नाम से जानते हैं। यहां सिलाई मशीनों की खटखट के बीच तिरंगे, गेरुआ, सफेद और हरे कपड़ों के झंडे तैयार किए जा रहे हैं। राजू के परिवार का दावा है कि झंडे बनाने का यह कारोबार ब्रिटिश शासन के समय से चला आ रहा है। उनके पूर्वज स्वतंत्रता आंदोलन के शुरुआती दौर में राष्ट्रीय झंडे तैयार करने के काम से जुड़े थे।
ब्रिटिश काल से चली आ रही विरासत, अब बढ़ी मांग
उसी विरासत को राजू आगे बढ़ा रहे हैं। कारखाने में राष्ट्रीय ध्वज के अलावा अलग-अलग त्योहारों के लिए रामनवमी के गेरुआ झंडे और अन्य रंग-बिरंगे पताके भी तैयार किए जाते हैं। राजू के मुताबिक, इस बार अन्य वर्षों की तुलना में करीब चार गुना अधिक ऑर्डर मिले हैं। कोलकाता, हावड़ा, हुगली, जलपाईगुड़ी, मालदा और मुर्शिदाबाद समेत राज्य के विभिन्न इलाकों से झंडों की मांग आई है। काम संभालने के लिए मेमारी, कांथी, उलूबेड़िया और बागनान समेत कई क्षेत्रों से करीब 20-25 दर्जी बुलाए गए हैं। रोजाना हजारों झंडे तैयार होकर राज्य के अलग-अलग हिस्सों में भेजे जा रहे हैं।