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टीएसजी भास्कर ने अंडमान-निकोबार दौरे के दौरान पूर्व झारखंड मंत्री से की मुलाकात

सन्मार्ग संवाददाता

श्री विजयपुरम: अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह के दौरे पर आए टीएसजी भास्कर, अध्यक्ष, कैंपेन कमेटी-एएनटीसीसी ने झारखंड के पूर्व मंत्री और विधायक बंधु तिर्की से महत्वपूर्ण बैठक की। इस अवसर पर दोनों नेताओं के बीच आदिवासी समाज, उनके सामाजिक और सांस्कृतिक मुद्दों तथा विकास की दिशा में किए जाने वाले प्रयासों को लेकर सार्थक और सकारात्मक चर्चा हुई। बैठक का मुख्य फोकस अंडमान-निकोबार में निवासरत छोटानागपुरी आदिवासी समुदाय की समस्याओं, उनकी चुनौतियों और प्रभावी प्रतिनिधित्व पर था। टीएसजी भास्कर और बंधु तिर्की ने इस बात पर जोर दिया कि आदिवासी समाज के कल्याण और उनके सामाजिक-सांस्कृतिक अधिकारों के लिए समन्वित प्रयास आवश्यक हैं। दोनों नेताओं ने ग्रामीण विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं और रोजगार के अवसरों के निर्माण जैसे मुद्दों पर भी विस्तार से चर्चा की।

इस अवसर पर टीएसजी भास्कर ने आदिवासी समुदाय के लिए चल रहे सरकारी और गैर-सरकारी कार्यक्रमों की प्रभावशीलता पर भी विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि समुदाय की वास्तविक समस्याओं के समाधान के लिए नीतियों का सही क्रियान्वयन और स्थानीय नेतृत्व का सहयोग अनिवार्य है।

बैठक में टीएसजी भास्कर के साथ सेबेस्टियन तिर्की, अध्यक्ष, आदिवासी कांग्रेस; अधिवक्ता प्रकाश मिंज, महासचिव, रांची एसोसिएशन; और आमेर बक्स, उपाध्यक्ष, अल्पसंख्यक विभाग, एएनटीसीसी भी मौजूद रहे। सभी उपस्थित लोगों ने मिलकर आदिवासी समाज के विकास के लिए नई रणनीतियों और योजनाओं पर चर्चा की। इसके अलावा, इस मुलाकात के दौरान टीएसजी भास्कर ने बंधु तिर्की को आगामी असम विधानसभा चुनाव के लिए एआईसीसी के वरिष्ठ पर्यवेक्षक के रूप में नियुक्त किए जाने पर बधाई दी और उन्हें सफलता की शुभकामनाएं दी। उन्होंने कहा कि बंधु तिर्की के अनुभव और नेतृत्व कौशल से चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता और प्रभावी परिणाम सुनिश्चित होंगे। बैठक का समापन दोनों नेताओं द्वारा आदिवासी समाज की भलाई और क्षेत्रीय विकास के लिए निरंतर सहयोग के संकल्प के साथ हुआ। टीएसजी भास्कर ने इस दौरान स्थानीय मुद्दों को समझने और उनकी बेहतर हल खोजने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। इस दौरे और बैठक से यह संदेश मिलता है कि आदिवासी समाज के विकास और उनके अधिकारों के संरक्षण के लिए नेताओं का समन्वित प्रयास अत्यंत महत्वपूर्ण है। अंडमान-निकोबार और झारखंड के आदिवासी समुदायों के लिए यह मुलाकात नई दिशा और प्रेरणा का प्रतीक मानी जा रही है।

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