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ट्रंप की ईरान को नई धमकी, “आज देखना क्या होता है”

ईरान के नए सुप्रीम लीडर ने युद्ध जारी रखने की चेतावनी दी; सऊदी अरब ने कई ड्रोन मार गिराए

मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने ईरान को एक और कड़ी चेतावनी दी है। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर लिखा, “आज देखिए इन पागल लोगों के साथ क्या होता है।”

उन्होंने दावा किया कि ईरान की नौसेना और वायुसेना लगभग खत्म हो चुकी है और मिसाइल तथा ड्रोन क्षमताओं को भी भारी नुकसान पहुंचा है। ट्रंप ने अपने पोस्ट में यह भी कहा कि “वे 47 साल से दुनिया भर में निर्दोष लोगों को मार रहे थे, और अब मैं, अमेरिका का 47वां राष्ट्रपति, उन्हें खत्म कर रहा हूं।”

इस बीच युद्ध के बीच एक और बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। अमेरिकी सेना का एक KC-135 Stratotanker विमान इराक में दुर्घटनाग्रस्त हो गया। United States Central Command (CENTCOM) के अनुसार यह घटना पश्चिमी इराक के हवाई क्षेत्र में सैन्य अभियान “Operation Epic Fury” के दौरान हुई। दो विमानों में से एक सुरक्षित उतर गया, जबकि दूसरा विमान गिर गया। विमान और उसके चालक दल की तलाश के लिए बचाव अभियान जारी है।

इधर ईरान के नए सुप्रीम लीडर Mojtaba Khamenei ने भी कड़ा रुख अपनाया है। अपने पहले सार्वजनिक बयान में उन्होंने कहा कि ईरान इस युद्ध से पीछे नहीं हटेगा और खाड़ी देशों को भी इसका खामियाजा भुगतना पड़ सकता है। उन्होंने चेतावनी दी कि युद्ध के “अन्य मोर्चे” भी खोले जा सकते हैं।

वहीं इजरायल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu ने दावा किया कि इजरायली हमले ईरान में सत्ता परिवर्तन की स्थिति बना रहे हैं। उन्होंने ईरान की जनता से कहा कि “अब फैसला आपके हाथ में है।”

क्षेत्र में बढ़ते हमलों के बीच Saudi Arabia ने अपने हवाई क्षेत्र में घुस रहे कई ड्रोन मार गिराने का दावा किया है। सऊदी रक्षा मंत्रालय के अनुसार कम से कम 12 ड्रोन को हवा में ही नष्ट कर दिया गया, जबकि अन्य कई ड्रोन भी गिराए गए।

इन घटनाओं का असर वैश्विक बाजार पर भी पड़ा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में शुक्रवार सुबह गिरावट दर्ज की गई। Brent Crude लगभग 0.7 प्रतिशत गिरकर करीब 99.75 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया, जबकि West Texas Intermediate क्रूड भी करीब 95 डॉलर प्रति बैरल के आसपास रहा।

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह संघर्ष और बढ़ता है, तो इसका असर वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति, अर्थव्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय यात्रा पर और गहरा पड़ सकता है।

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