वॉशिंगटन/इस्लामाबाद : Donald Trump ने ईरान के साथ असफल शांति वार्ता के बाद सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि उन्हें इस बात की परवाह नहीं है कि Iran बातचीत में वापस आता है या नहीं।
एयर फोर्स वन के बाहर पत्रकारों से बातचीत में ट्रंप ने कहा, “ईरान इस समय बहुत खराब स्थिति में है।” उन्होंने बताया कि वॉशिंगटन और तेहरान के बीच करीब 21 घंटे तक बातचीत चली, लेकिन कोई ठोस समझौता नहीं हो सका।
ट्रंप ने दो टूक कहा कि ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने की इजाजत नहीं दी जाएगी। उन्होंने कहा, “वे अभी भी इसे चाहते हैं, लेकिन ऐसा कभी नहीं होगा।”
बातचीत फिर से शुरू होने की संभावना पर उन्होंने कहा, “मुझे नहीं पता, और मुझे फर्क भी नहीं पड़ता। अगर वे वापस नहीं आते, तो भी मैं ठीक हूं।”
अमेरिकी राष्ट्रपति ने दावा किया कि ईरान की सैन्य ताकत काफी कमजोर हो चुकी है। उनके मुताबिक, ईरान की मिसाइलें “काफी हद तक खत्म” हो चुकी हैं और मिसाइल व ड्रोन बनाने की क्षमता भी बुरी तरह प्रभावित हुई है।
ट्रंप ने आरोप लगाया कि ईरान ने हॉर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने का वादा तोड़ा। उन्होंने कहा, “उन्होंने झूठ बोला, इसलिए हमें कार्रवाई करनी पड़ी।”
उन्होंने दोहराया कि अमेरिकी नौसेना Strait of Hormuz में जहाजों की आवाजाही को रोकने की प्रक्रिया शुरू करेगी और अन्य देश भी इसमें सहयोग कर रहे हैं ताकि ईरान तेल नहीं बेच सके।
ट्रंप ने ईरान पर हॉर्मुज के जरिए “दुनिया से जबरन वसूली” करने का आरोप लगाया और कहा कि जो देश ईरान को “गैरकानूनी शुल्क” देंगे, उन्हें समुद्र में सुरक्षित रास्ता नहीं मिलेगा।
ईरान की सरकारी प्रसारण संस्था Islamic Republic of Iran Broadcasting (IRIB) के मुताबिक, तेहरान ने बातचीत में “ईमानदारी” से हिस्सा लिया, लेकिन अमेरिका की “अतार्किक मांगों” के कारण समझौता नहीं हो सका।
रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी पक्ष का नेतृत्व उपराष्ट्रपति JD Vance कर रहे थे और उन्होंने कई सख्त शर्तें रखीं, जिन्हें ईरान ने स्वीकार नहीं किया।