वॉशिंगटनः अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि वह दक्षिण कोरियाई वस्तुओं पर शुल्क (टैरिफ) बढ़ा रहे हैं, क्योंकि वहां की नेशनल असेंबली ने अक्टूबर में तय हुए व्यापार ढांचे को अभी तक मंजूरी नहीं दी है।
ट्रंप ने सोमवार को सोशल मीडिया पर कहा कि दक्षिण कोरिया से आयात होने वाली गाड़ियों, लकड़ी और दवाइयों पर आयात कर बढ़ाया जाएगा, जबकि अन्य वस्तुओं पर शुल्क की दर 15 प्रतिशत से बढ़ाकर 25 प्रतिशत कर दी जाएगी। अमेरिकी राष्ट्रपति ने इससे पहले आर्थिक आपात स्थिति घोषित कर और कांग्रेस को दरकिनार करते हुए शुल्क लगाए थे, जबकि दक्षिण कोरिया को जुलाई में घोषित और ट्रंप की अक्टूबर यात्रा के दौरान तय हुए इस ढांचे के लिए विधायी मंजूरी की जरूरत है।
ट्रंप ने कहा, ‘‘हमारे व्यापार समझौते अमेरिका के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं। इन सभी सौदों में हमने तय किए गए समझौते के अनुरूप अपने शुल्क तेजी से कम किए हैं। हम स्वाभाविक रूप से उम्मीद करते हैं कि हमारे व्यापारिक साझेदार भी ऐसा ही करें।’’
यह धमकी इस बात की याद दिलाती है कि पिछले साल ट्रंप द्वारा शुरू किया शुल्क लगाने की धमकी देने का सिलसिला इस साल भी बार-बार दोहराया जा सकता है। ट्रंप पहले भी अपने शुल्क को दक्षिण कोरिया द्वारा अमेरिकी अर्थव्यवस्था में कई वर्षों में 350 अरब अमेरिकी डॉलर के निवेश की प्रतिबद्धताओं से जोड़ चुके हैं, जिसमें अमेरिकी शिपयार्ड्स को पुनर्जीवित करने के प्रयास भी शामिल हैं।
ट्रंप और द. कोरिया में रिश्ते सामान्य नहीं
ट्रंप प्रशासन और दक्षिण कोरिया के रिश्ते कभी-कभी तनावपूर्ण रहे हैं। पिछले वर्ष जॉर्जिया में हुंडई के एक विनिर्माण संयंत्र पर आव्रजन अधिकारियों की छापेमारी के दौरान 475 लोगों को हिरासत में लिया गया था, जिससे संबंधों में खटास आई थी। दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति कार्यालय ने एक बयान में कहा कि अमेरिका ने उसे शुल्क बढ़ाने की योजना की आधिकारिक सूचना नहीं दी है।
बयान में कहा गया है कि इस समय कनाडा की यात्रा पर गए दक्षिण कोरिया के उद्योग मंत्री किम जंग-क्वान जल्द ही अमेरिका जाएंगे और वाणिज्य मंत्री हॉवर्ड लुटनिक के साथ बातचीत करेंगे। बयान के अनुसार, राष्ट्रपति के नीति संबंधी मामलों के मुख्य सचिव किम योंग-बोम ट्रंप की घोषणा पर चर्चा के लिए एक बैठक बुलाएंगे।
ट्रंप ने अमेरिका को ग्रीनलैंड न सौंपने पर पिछले सप्ताह ही आठ यूरोपीय देशों पर शुल्क लगाने की धमकी दी थी। हालांकि, स्विट्ज़रलैंड के दावोस में विश्व आर्थिक मंच की बैठकों के बाद उन्होंने इस धमकी से कदम पीछे खींच लिए थे।