नई दिल्लीः तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के सदस्यों ने सोमवार को राज्यसभा की बैठक शुरू होने के कुछ ही देर बाद, एक बार फिर पश्चिम बंगाल की लंबित केंद्रीय बकाया राशि का मुद्दा उठाने का प्रयास किया और अनुमति न मिलने पर विरोध जताते हुए सदन से बहिर्गमन किया।
उच्च सदन की बैठक शुरू होने के बाद सभापति सीपी राधाकृष्णन ने आवश्यक दस्तावेज सदन के पटल पर रखवाए। इसके बाद उन्होंने शून्यकाल के तहत सदस्यों से अपने अपने मुद्दे उठाने को कहा। उन्होंने आम आदमी पार्टी के राजिन्दर गुप्ता को अपना मुद्दा उठाने की अनुमति दी।
इसी दौरान तृणमूल कांग्रेस के सदस्यों ने पश्चिम बंगाल की लंबित केंद्रीय बकाया राशि का मुद्दा उठाने का प्रयास किया। सभापति ने उन्हें इसकी अनुमति नहीं दी। तृणमूल सदस्यों के हंगामे के बीच उन्होंने कहा कि कार्यवाही में केवल उन सदस्यों की ही बात जाएगी जिन्हें वह अनुमति देंगे।
दो लाख करोड़ रुपये का बकाया
तृणमूल सदस्यों ने इस पर विरोध जताते हुए सदन से बहिर्गमन किया। बहिर्गमन के बाद राज्यसभा में पार्टी की उपनेता सागरिका घोष ने मीडिया के समक्ष आरोप लगाया कि केंद्र सरकार पर पश्चिम बंगाल का करीब दो लाख करोड़ रुपये बकाया है। उन्होंने कहा, “आज राज्यसभा में तृणमूल कांग्रेस के सदस्यों ने बहिर्गमन किया, क्योंकि बजट में बंगाल का एक बार भी जिक्र नहीं किया गया और राज्य की विभिन्न मद की बकाया राशि उसे अब तक नहीं मिली है।’’
बजट में बंगाल की पूरी तरह अनदेखी
सागरिका घोष ने पीटीआई-वीडियो से कहा कि मनरेगा, आवास योजना, पीएमएवाई सहित विभिन्न मदों में बंगाल का दो लाख करोड़ रुपये बकाया है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह संघीय ढांचे, केंद्र-राज्य संबंधों और संविधान का उल्लंघन है। घोष ने यह भी दावा किया कि रविवार को संसद में 2026-27 के लिए पेश किए गए केंद्रीय बजट में पश्चिम बंगाल की पूरी तरह अनदेखी की गई है। उन्होंने कहा, “बजट में जिस तरह से बंगाल को नजरअंदाज किया गया, उसी के विरोध में आज हमने संसद के पटल पर यह मुद्दा उठाया और बहिर्गमन किया।”
बंगाल के साथ भेदभाव का आरोप
राज्यसभा में तृणमूल की एक अन्य सदस्य ममता ठाकुर ने भी केंद्र सरकार पर पश्चिम बंगाल के साथ भेदभाव का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि 2021 के विधानसभा चुनावों में भाजपा की हार के बाद केंद्र ने राज्य को लेकर प्रतिशोध की नीति अपनाई हुई है। ठाकुर ने कहा, “बंगाल की जनता ने 2021 में भाजपा को निर्णायक रूप से खारिज किया। इसके बाद केंद्र ने संघीय जिम्मेदारी निभाने के बजाय मनरेगा की मजदूरी रोक दी, सड़कों और ग्रामीण बुनियादी ढांचे के लिए धन रोका और गरीबों व वंचितों के लिए कल्याणकारी योजनाओं से जुड़ी राशि अटका दी।” उन्होंने इस “सुनियोजित भेदभाव” को अस्वीकार्य बताते हुए कहा, “इस गंभीर अन्याय के विरोध में तृणमूल के राज्यसभा सदस्यों ने आज सदन से बहिर्गमन किया है। जब तक बंगाल को उसका जायज हक नहीं मिल जाता, हम संसद के भीतर और बाहर अपनी आवाज उठाते रहेंगे।”