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तृणमूल सांसद काकोली ने अध्यक्ष पद से इस्तीफा दिया

सन्मार्ग संवाददाता

कोलकाता : पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में मिली करारी हार के बाद तृणमूल कांग्रेस में शुरू हुई खींचतान का अंत होता नहीं दिख रहा और इसी कड़ी में हार की ‘‘नैतिक जिम्मेदारी’’ लेते हुए पार्टी सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने बारासात संगठनात्मक जिला अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने चुनाव प्रचार रणनीति और नेतृत्व की प्राथमिकताओं की भी कड़ी आलोचना की है। बारासात से चार बार की सांसद काकोली को तृणमूल के पुराने नेताओं में से एक माना जाता है। उनका इस्तीफा तृणमूल की चुनावी हार के बाद लोकसभा में पार्टी के मुख्य सचेतक पद से उन्हें हटाए जाने और उनकी जगह वरिष्ठ सांसद कल्याण बनर्जी को नियुक्त किए जाने के कुछ दिनों बाद आया है। काकोली ने तृणमूल कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष सुब्रत बख्शी को भेजे त्यागपत्र में औपचारिक रूप से बारासात और उत्तर 24 परगना के आसपास के क्षेत्रों में खराब चुनावी प्रदर्शन के लिए जवाबदेही का उल्लेख किया गया है। लेकिन इसका राजनीतिक संदेश स्थानीय संगठनात्मक जिम्मेदारी से कहीं अधिक व्यापक प्रतीत हो रहा है। काकोली ने तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो ममता बनर्जी से पार्टी की कार्यप्रणाली के पुराने तरीके - जनता के मुद्दों पर सड़क पर संघर्ष करने - पर लौटने की अपील की। उनके इस बयान को चुनाव रणनीतिकार आईपैक (इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी)और पार्टी नेतृत्व के आसपास के नये राजनीतिक पारिवेश के बढ़ते प्रभाव पर एक परोक्ष लेकिन तीखे हमले के रूप में देखा जा रहा है।उन्होंने लिखा, ‘नेता ममता बनर्जी, यदि आप पहले की तरह ईमानदार, अनुभवी और समर्पित कार्यकर्ताओं के साथ काम करेंगी, तो पार्टी की छवि फिर से उज्ज्वल हो जाएगी। कठिन कार्यों को क्षणिक संगठनों के माध्यम से पूरा नहीं किया जा सकता है।’राजनीतिक हलकों ने इस टिप्पणी को आईपैक पर सीधा हमला माना है, जो चुनाव परामर्श फर्म है और जिसे पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी के नेतृत्व में तृणमूल के साथ गहराई से जुड़ा हुआ माना जाता है।

काकोली ने कही यह बड़ी बात

तृणमूल सांसद ने संवाददाताओं से बातचीत के दौरान अपने हमले को और तेज कर दिया। उन्होंने कहा, ‘मैंने आईपैक को काम पर नहीं रखा। लेकिन मैंने देखा कि ये युवा लड़के-लड़कियां हम जैसे पूर्णकालिक पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ कैसा व्यवहार करते हैं। मैं यहां 17 वर्षों से जन प्रतिनिधि हूं। मेरा कार्यालय लोगों के लिए चौबीसों घंटे खुला रहता है।’ काकोली ने कहा कि उन्होंने अपने लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले सात विधानसभा क्षेत्रों में व्यापक रूप से काम किया है और उन्हें उम्मीद है कि जनता का समर्थन बरकरार रहेगा। उन्होंने कहा, ‘लेकिन नतीजों से साफ हो गया कि लोगों ने हमें स्वीकार नहीं किया। पार्टी में हर स्तर पर अपराधीकरण हुआ है। तृणमूल की सीट घटकर 80 हो गई हैं जो मुझे स्वीकार्य नहीं है। मैं एक आम कार्यकर्ता के तौर पर काम करती रहूंगी।’ काकोली ने कहा कि वह नेतृत्व को अपनी चिंताओं से अवगत नहीं करा सकीं क्योंकि ममता बनर्जी पिछले एक दशक से बहुत व्यस्त रही हैं, और उनसे फोन पर संपर्क करना मुश्किल हो गया था।

काकोली के त्यागपत्र ने नई बहस छेड़ दी

काकोली के त्यागपत्र ने राजनीतिक हलकों में इस बात पर नई बहस छेड़ दी है कि क्या विधानसभा चुनावों में मिली करारी हार ने तृणमूल के भीतर पुरानी संगठनात्मक संरचना और नयी, रणनीति-आधारित राजनीतिक मॉडल के बीच गहरी दरारें पैदा कर दी हैं। काकोली ने भ्रष्टाचार और अपराधीकरण के आरोपों पर भी चिंता व्यक्त की। ये ऐसे मुद्दे हैं जिनका विपक्षी दलों ने चुनाव प्रचार अभियान के दौरान तृणमूल पर बार-बार हमले के लिए इस्तेमाल किया।उन्होंने लिखा, ‘‘पश्चिम बंगाल में हाल ही में हुई आपराधिक और भ्रष्टाचार की घटनाओं ने स्वाभाविक रूप से लोगों में चिंता और आशंका पैदा कर दी है। लोकतंत्र को और मजबूत करने के लिए राजनीति में पारदर्शिता, जवाबदेही, जिम्मेदारी, मर्यादा और मूल्यों को अधिक महत्व दिया जाना चाहिए।’’ इन टिप्पणियों का महत्व इसलिए बढ़ गया क्योंकि इनमें विपक्ष द्वारा अक्सर उठाई जाने वाली चिंताओं की प्रतिध्वनि है और ऐसा प्रतीत हो रहा है कि ये चुनावी हार के बाद पार्टी की छवि को लेकर आंतरिक खींचतान का संकेत दे रही हैं।

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