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तृणमूल कांग्रेस ने भाजपा-ईसीआई पर लगाया गठजोड़ का आरोप

सबिता, सन्मार्ग संवाददाता

कोलकाता : जलपाईगुड़ी में एक मोमो विक्रेता की मौत का कारण कथित तौर एसआईआर का आतंक बताया गया है। त़णमूल ने इसकी निंदा की है। तृणमूल ने सोशल साइट पर लिखा कि, बंगाल में एक बार फिर दिल दहला देने वाली घटना घटी है। जलपाईगुड़ी के एक साधारण मोमो विक्रेता, गौरंग दे ने आत्महत्या कर ली, क्योंकि उनका नाम मतदाता सूची से हटा दिया था। तृणमूल ने कहा कि SIR ने लगभग चार दशकों तक निष्ठापूर्वक मतदान करने के बावजूद उनका नाम हटा दिया गया। निर्दयतापूर्वक भाजपा-ECI का यह घिनौना गठजोड़ गरीबों, हाशिए पर पड़े लोगों और बंगाल के सही मतदाताओं को अभूतपूर्व पैमाने पर मताधिकार से वंचित करने की सुनियोजित साजिश रच रहा है। मां-माटी-मानुष सरकार बंगाल की जनता के साथ पूरी तरह खड़ी है। लोगों के अधिकारों और गरिमा की रक्षा करेंगे।

दो लोगों ने की ‘आत्महत्या’, तृणमूल ने चुनाव आयोग पर साधा निशाना

जलपाईगुड़ी और दक्षिण 24 परगना जिलों में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के तहत अंतिम सूची के प्रकाशन के बाद ‘‘मानसिक तनाव’’ के कारण दो लोगों ने कथित तौर पर आत्महत्या कर ली। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि रफीक अली गाजी (44) का शव दक्षिण 24 परगना के घोलपारा इलाके में बुधवार सुबह अपने कमरे में फंदे से लटका हुआ पाया गया। उन्होंने कहा, गाजी का नाम सूची में ‘‘विचाराधीन’’ श्रेणी में पाया गया।उनके परिवार ने दावा किया कि उस श्रेणी में अपना नाम पाकर वह गंभीर मानसिक तनाव में थे। पुलिस ने कहा कि एक अन्य घटना में जलपाईगुड़ी शहर में मोमो विक्रेता गौरंग दे (62) को भी मंगलवार सुबह अपने आवास के शौचालय में लटका हुआ पाया गया। पत्नी ने दावा किया कि 28 फरवरी को प्रकाशित अंतिम सूची में उनका नाम ‘हटाए गए’ श्रेणी में आने के बाद वह बेहद चिंतित थे। तृणमूल ने मौत के लिए चुनाव आयोग पर निशाना साधा है।

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