कोलकाता: सिंगुर में उद्योग के लिए कृषि भूमि अधिग्रहण के खिलाफ तत्कालीन विपक्षी नेता ममता बनर्जी द्वारा कोलकाता में धरने का इतिहास रहा है। उस समय के आंदोलन ने उनकी मुख्यमंत्री बनने की राह में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित किया। बाद में, पूर्व कोलकाता पुलिस आयुक्त राजीव कुमार के खिलाफ सीबीआई कार्रवाई के विरोध में भी ममता ने मेट्रो चैनल पर धरना देकर जनसंदेश दिया था।
अब, 2026 में SIR (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) को लेकर चुनाव आयोग के साथ विवाद अपने चरम पर पहुंच गया है। इसी विवाद के बीच मुख्यमंत्री ममता बनर्जी शुक्रवार को दोपहर करीब 2 बजे मेट्रो चैनल पर धरने पर बैठेंगी। उनके साथ पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी और वरिष्ठ नेता भी उपस्थित रहेंगे।
राज्य की अंतिम मतदाता सूची में 60 लाख से अधिक मतदाताओं को ‘अंडर एडजुडिकेशन’ यानी विचाराधीन श्रेणी में रखा गया है। लगभग 5.46 लाख मतदाताओं के नाम सूची से हटा दिए गए हैं। तृणमूल कांग्रेस का दावा है कि सूची जारी होने के बाद भय और तनाव के कारण गुरुवार तक कम से कम 10 लोगों की मौत हो चुकी है और एक व्यक्ति अस्पताल में भर्ती है।
पार्टी नेतृत्व का आरोप है कि प्रक्रिया के कारण आम लोगों में डर का माहौल बन गया है और इसलिए पार्टी लगातार चुनाव आयोग की आलोचना कर रही है। धरना स्थल पर तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं। हेयर स्ट्रीट थाना के सामने विशाल मंच बनाया जा रहा है, जहां बिजली, ध्वनि और सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की जा रही है।
राज्य के शहरी विकास मंत्री फिरहाद हकीम ने निरीक्षण के दौरान कहा कि नागरिकता के नाम पर आयोग द्वारा आम लोगों को परेशान करने की स्थिति की सबसे कड़ी निंदा केवल मुख्यमंत्री ही कर सकती हैं। पार्टी का दावा है कि कोलकाता और आसपास के जिलों से हजारों कार्यकर्ता धरने में शामिल होंगे। इसी मंच से ममता बनर्जी आगामी रणनीति और आंदोलन के अगले चरण की घोषणा कर सकती हैं।
इस धरने के माध्यम से तृणमूल कांग्रेस चुनाव आयोग के निर्णयों के खिलाफ अपना विरोध और जनता के अधिकारों की रक्षा का संदेश पूरे राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर पहुंचाने का प्रयास कर रही है।