पार्षद के घर पहुंचे भाजपा नेता अर्जुन सिंह  
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अर्जुन सिंह के साथ दिखीं टीएमसी पार्षद !

निधि, सन्मार्ग संवाददाता

बैरकपुर: पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव की आहट के साथ ही उत्तर 24 परगना की राजनीति में दलबदल का खेल शुरू हो गया है। उत्तर बैरकপুর नगर पालिका के वार्ड नंबर 15 की टीएमसी पार्षद श्रावणी कश्यप और उनके पति मृण्मय कश्यप को पूर्व सांसद और कद्दावर भाजपा नेता अर्जुन सिंह के साथ देखे जाने के बाद इलाके में राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। रविवार को अर्जुन सिंह स्वयं कश्यप दंपति के घर पहुंचे और उनसे लंबी बातचीत की, जिसके बाद उनके भाजपा में शामिल होने की अटकलों पर मुहर लगती दिख रही है।

अपमान और उपेक्षा का आरोप

पार्षद श्रावणी कश्यप ने अपनी ही पार्टी पर आरोप लगाते हुए कहा कि दल के भीतर उन्हें लगातार प्रताड़ित किया जा रहा है। उन्होंने कहा, "एक निर्वाचित पार्षद होने के बावजूद मुझे पार्टी में वह सम्मान और जगह नहीं मिली जिसकी मैं हकदार थी। जो अपमान हमने सहा है, वह अब बर्दाश्त के बाहर हो चुका है।" वहीं उनके पति मृण्मय कश्यप, जिन्हें कभी पूर्व खाद्य मंत्री ज्योतिप्रिय मल्लिक का 'छाया संगी' और बेहद करीबी माना जाता था, उन्होंने कहा कि वे काम करने की इच्छा से राजनीति में हैं और मौजूदा परिस्थितियों में वहां काम करना संभव नहीं है।

अर्जुन सिंह का दावा: कतार में हैं कई और नेता

इस मुलाकात के बाद भाजपा नेता अर्जुन सिंह ने मीडिया से बातचीत में स्पष्ट किया कि उन्होंने कश्यप दंपति को भाजपा में शामिल होने का औपचारिक न्योता दिया है। उन्होंने आत्मविश्वास के साथ दावा किया कि 'पौष' का महीना (शुभ समय का इंतजार) खत्म होते ही यह दंपति आधिकारिक तौर पर भाजपा का झंडा थाम लेगा। सिंह ने यह भी संकेत दिया कि श्रावणी कश्यप तो सिर्फ शुरुआत हैं, टीएमसी के कई अन्य बड़े चेहरे भी भाजपा में आने के लिए कतार में खड़े हैं।

एसआईटी की जांच पर उठाए सवाल

दूसरी ओर, मंगलवार को अर्जुन सिंह अपने आवास 'मजदूर भवन' के पास 26 मार्च को हुई बमबाजी के मामले में जगदल थाने पहुंचे। थाने से बाहर निकलने के बाद उन्होंने जांच प्रक्रिया पर असंतोष जताया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि यदि उन्हें एसआईटी (SIT) की जांच निष्पक्ष और सही नहीं लगी, तो वे न्याय के लिए पुनः अदालत का दरवाजा खटखटाएंगे।

बैरकपुर के राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि श्रावणी कश्यप भाजपा में जाती हैं, तो यह उत्तर बैरकपुर में तृणमूल कांग्रेस के लिए एक बड़ा संगठनात्मक झटका हो सकता है।

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