कैनिंग: गोसाबा विधानसभा के लाहिरीपुर पंचायत अंतर्गत पारसमणि गांव में बाघ के पैरों के निशान मिलने से स्थानीय लोगों में दहशत फैल गई है। बुधवार की सुबह जब कुछ मछुआरे नदी किनारे मछली पकड़ने गए, तो उन्होंने बाघ के पैरों के निशान देखे। इससे पूरे गांव में भय का माहौल बन गया और लोग काफी चिंतित हो उठे। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, माना जा रहा है कि यह बाघ मिर्चीझांपी जंगल से कापुरा नदी पार करके गांव में आया था। हालांकि, इसके लौटने का अभी तक कोई संकेत नहीं मिला है। वन विभाग ने स्थिति को गंभीरता से लेते हुए जंगल को चारों ओर से जाल से घेर लिया है और बाघ की खोज के लिए जाल के अंदर सघन तलाशी अभियान शुरू कर दिया है। इसके साथ ही बाघ को भगाने के लिए पटाखे भी फोड़े गए, ताकि वह जंगल की ओर लौट सके। वनकर्मियों ने लगभग 200 मीटर क्षेत्र की बाड़बंदी कर दी है, ताकि बाघ इस इलाके में और नुकसान न पहुंचा सके। वहीं ग्रामीण तटबंध पर डटे हुए हैं और बाघ को पकड़ने या भागते हुए देखने का इंतजार कर रहे हैं। हालांकि, इलाके के ग्रामीणों का कहना है कि इस क्षेत्र में पहले कभी बाघ नहीं आया है, इसलिए उनकी यह स्थिति पूरी तरह से नई और डरावनी है। दक्षिण 24 परगना जिला परिषद के उपाध्यक्ष अनिमेष मंडल ने कहा है कि बाघ इलाके से फरार हो चुका है और फिलहाल इलाके में शांति है। उन्होंने सभी से शांति बनाए रखने और वन विभाग के दिशा-निर्देशों का पालन करने की अपील की है। वन विभाग भी लोगों की सुरक्षा के लिए हरसंभव प्रयास कर रहा है। यह घटना इस बात का संकेत है कि सुंदरवन के घने जंगलों में बाघ अब अपने प्राकृतिक आवास से बाहर आने लगे हैं, जिससे आसपास के लोगों की सुरक्षा एक बड़ी चुनौती बन गई है। स्थानीय प्रशासन और वन विभाग इस प्रकार की घटनाओं को रोकने और नियंत्रण में रखने के लिए लगातार प्रयासरत हैं। अभी तक बाघ के दिखने की सूचना के बाद से गांव में सतर्कता बढ़ा दी गई है और लोग अपने बच्चों व वृद्धजनों को बाहर जाने से रोक रहे हैं। वन विभाग की टीम भी लगातार इलाके की निगरानी कर रही है ताकि किसी अप्रिय घटना को रोका जा सके।