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Red Sea केबल पर खतरा, भारत की इंटरनेट कनेक्टिविटी पर मंडराया संकट

पश्चिम एशिया युद्ध के बीच अंडरसी केबल कटने की आशंका, डिजिटल सेवाओं पर पड़ सकता है बड़ा असर

नई दिल्ली : पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच रेड सी (लाल सागर) में मौजूद अंडरसी इंटरनेट केबल्स को लेकर चिंता बढ़ती जा रही है। ईरान, अमेरिका और इज़राइल के बीच बढ़ते तनाव के चलते इंटरनेट सेवाओं में बड़े व्यवधान की आशंका जताई जा रही है। हालांकि ईरान ने आधिकारिक तौर पर केबल काटने की धमकी नहीं दी है, लेकिन हूती विद्रोही समूह ने पहले सोशल मीडिया पर ऐसी चेतावनियां दी हैं। ईरान समर्थित इस समूह के शामिल होने से खतरा और बढ़ गया है।

सितंबर 2025 में भी रेड सी केबल्स को नुकसान पहुंचा था, जब एक व्यावसायिक जहाज के एंकर घसीटने से कई फाइबर ऑप्टिक केबल कट गए थे। इस घटना से पश्चिम और दक्षिण एशिया के कई देशों में इंटरनेट सेवाएं प्रभावित हुई थीं।

इंटरनेशनल केबल प्रोटेक्शन कमिटी के अनुसार, उस घटना में चार प्रमुख केबल प्रभावित हुए थे—

  • South East Asia–Middle East–Western Europe 4

  • India-Middle East-Western Europe

  • FALCON (GCX)

  • Europe India Gateway

विशेषज्ञों के मुताबिक, हर साल लगभग 30% केबल क्षति एंकर घसीटने जैसी घटनाओं से होती है, लेकिन मौजूदा हालात में जानबूझकर हमले का खतरा अधिक गंभीर माना जा रहा है। रेड सी के ये केबल वैश्विक इंटरनेट ट्रैफिक की रीढ़ हैं, जिनके जरिए वित्तीय लेन-देन, क्लाउड सेवाएं, वीडियो कॉल, ईमेल और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस नेटवर्क संचालित होते हैं।

भारत पर प्रभाव की बात करें तो सितंबर 2025 की घटना के दौरान देश में इंटरनेट पूरी तरह बंद नहीं हुआ था, लेकिन कई नेटवर्क में धीमापन और आउटेज देखने को मिला था। आज भारत की अर्थव्यवस्था डिजिटल पेमेंट, क्लाउड और एआई सेवाओं पर काफी निर्भर है, ऐसे में केबल कटने से बड़ा आर्थिक असर पड़ सकता है। भारत में करीब 95% अंतरराष्ट्रीय डेटा इन अंडरसी केबल्स से गुजरता है। देश में 17 केबल्स 14 लैंडिंग स्टेशनों—मुंबई, चेन्नई, कोच्चि, तूतीकोरिन और तिरुवनंतपुरम—पर जुड़े हैं।

हालांकि, इंटरनेट ट्रैफिक का बड़ा हिस्सा मुंबई और चेन्नई पर निर्भर है, जो एक कमजोर कड़ी बन सकता है। इन केंद्रों पर किसी भी तरह की तकनीकी खराबी या प्राकृतिक आपदा से देशभर में कनेक्टिविटी प्रभावित हो सकती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच रेड सी और होर्मुज़ जलडमरूमध्य जैसे क्षेत्रों में जोखिम बना रहेगा, जिससे भारत सहित कई देशों की इंटरनेट स्थिरता पर असर पड़ सकता है।

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