नई दिल्लीः वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बृहस्पतिवार को राज्यसभा में कहा कि वैश्विक स्थिति के विपरीत भारत में जीडीपी विकास दर अधिक और मुद्रास्फीति कम है जो एक दुर्लभ स्थिति है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि देश की अर्थव्यवस्था को कमजोर बताने वाले दरअसल देश के उन सभी लोगों का मजाक बना रहे हैं जिनके कारण यह उपलब्धि हासिल हो पायी है।
उच्च सदन में आम बजट 2026-27 पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि यह बजट ऐसे ऐतिहासिक समय में पेश किया जा रहा है जब देश की सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की ऊंची दर है और मुद्रास्फीति की दर कम है जो दुर्लभ बात है। उन्होंने कहा कि यह स्थिति कोई तुक्का नहीं है बल्कि यह समय पर लिए गए विस्तृत निर्णय एवं कदमों तथा सतत विकास का परिणाम है।
उन्होंने कहा, ‘‘यह एक दुर्लभ क्षण है जिसने हमें अगले दो दशक, 2047 तक के लिए योजना बनाने का अवसर दिया है...हमारा लक्ष्य विकसित भारत है।’’ इसी पृष्ठभूमि में बजट तैयार किया गया है। सीतारमण ने कहा कि राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय के अग्रिम अनुमानों के अनुसार 2025-26 की वास्तविक जीडीपी विकास दर 7.4 प्रतिशत बतायी गयी है तथा सामान्य विकास दर करीब आठ प्रतिशत होगी। उन्होंने कहा कि उपभोक्ता मूल्य सूचकांक घटकर करीब दो प्रतिशत रह गया है।
भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत परिलक्षित
वित्त मंत्री ने कहा कि वह जिस स्थिति की बात कर रही है उसमें ऊंची विकास दर, दामों में स्थिरता है जो वैश्विक स्तर पर कम देखने को मिल रही है। उन्होंने कहा कि यह भारतीय अर्थव्यवस्था की आधारभूत स्थिति को परिलक्षित करती है। सीतारमण ने कहा कि वह इस बात को दोहराना चाहती हैं कि यह उपलब्धि भारत के लोगों की उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था को मृत अर्थव्यवस्था बताने वाले और इसकी आलोचना करने वाले लोग दरअसल यह कहकर भारत के उन लोगों की उपलब्धि का मजाक बना रहे हैं जो अपने-अपने स्तर पर इसके विकास में योगदान दे रहे हैं।
बजट में आत्मनिर्भरता का ध्यान
उन्होंने कहा कि 2026-27 का बजट इस तरीके से डिजाइन किया गया है कि इन उपलब्धियों का लाभ उठाया जा सके, इन सूक्ष्म आर्थिक स्थिरता कारकों को दीर्घकालिक उत्पादक क्षमताओं में परिवर्तित किया जा सके। उन्होंने कहा कि इस विकास गति को अगले दशकों तक विस्तार दिया जा सकेगा।
उन्होंने कहा कि इन सबमें आत्मनिर्भरता एक महत्वपूर्ण सिद्धान्त है तथा सरकार ने बजट में जो भी घोषणाएं कीं और नीतियां बनायी हैं, उसमें आत्मनिर्भरता का ध्यान रखा गया है। उन्होंने कहा, ‘‘हमने घरेलू उत्पादन क्षमता का निर्माण किया है... बजट का निर्माण करते समय हमने ऊर्जा सुरक्षा को भी अपने ध्यान में रखा है।’’