कोलकाता : दुर्गापूजा को लेकर भारत सेवाश्रम संघ के संन्यासी तथा भाजपा के करीबी माने जाने वाले कार्तिक महाराज ने परंपरा के साथ राजनीतिक संदेश भी दिया। उन्होंने कहा कि पितृपक्ष में दुर्गापूजा का उद्घाटन नहीं होना चाहिए। इस बार बंगाल में नियमों का पालन करते हुए ही पूजा का उद्घाटन होगा। उनके बयान को पिछली सरकार के दौरान पितृपक्ष में पूजा उद्घाटन की प्रथा पर अप्रत्यक्ष टिप्पणी माना जा रहा है।
बुधवार को आईसीसीआर में आयोजित ‘बंगाल एआई, रोबोटिक्स एंड डिजिटल समिट 2026’ के कार्यक्रम में पहुंचे कार्तिक महाराज ने किसानों और मछुआरों के लिए एआई एवं रोबोटिक्स के उपयोग पर भी चर्चा की। वहीं, दुर्गापूजा की थीम को लेकर उन्होंने कहा कि आधुनिक प्रयोगों के बावजूद देवी-देवताओं का पारंपरिक स्वरूप बरकरार रहना चाहिए। उन्होंने दुर्गा, लक्ष्मी, गणेश, कार्तिक और सरस्वती को सनातनी परंपरा के अनुरूप प्रस्तुत करने की वकालत की।
राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण यह है कि पूजा के सांस्कृतिक स्वरूप को लेकर उनका बयान ऐसे समय आया है, जब बंगाल में धार्मिक परंपरा और सांस्कृतिक पहचान लगातार राजनीतिक बहस के केंद्र में हैं।
इधर, पूजा के बाद शहर की छह सड़कों के नाम बदलने की प्रक्रिया भी आगे बढ़ाने की तैयारी है। समिति प्रमुख कार्तिक महाराज का दावा है कि समिति ने कई स्वदेशी नामों पर विचार किया है। उन्होंने कहा कि ऐसे नाम हटाए जाएंगे, जिनका बंगाल की सांस्कृतिक परंपरा से कोई संबंध नहीं है।