नई दिल्लीः व्यय सचिव वी वुअलनाम ने मंगलवार को कहा कि आठवें वेतन आयोग ने अपना काम अभी शुरू किया है और यह शुरुआती चरण में है, ऐसे में बजट में फिलहाल इसको लेकर कोई प्रावधान नहीं किया गया है।
उन्होंने यह भी कहा कि कर्ज-जीडीपी अनुपात को अपनाया गया है लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि हम राजकोषीय घाटा छोड़ेंगे। राजकोषीय घाटा महत्वपूर्ण है और हम इस पर नजर रखना जारी रखेंगे। वुअलनाम ने पीटीआई को दिये साक्षात्कार में कहा, ‘‘बजट में अभी आठवें वेतन आयोग को ध्यान में रखकर कोई प्रावधान नहीं किया गया है। इसका कारण आठवें वेतन आयोग का अभी-अभी गठन हुआ है। सदस्य अपना काम शुरू कर रहे हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘वे सहायता के लिए अधिकारियों को भी शामिल कर रहे हैं। इसलिए यह बिल्कुल शुरुआती दौर है। अभी तक हमने इसके प्रभाव और अन्य पहलुओं के बारे में कोई गणना नहीं की है, जो हमें समय आने पर पता चलेगा।’’
उल्लेखनीय है कि सरकार ने जनवरी में आठवें वेतन आयोग का गठन किया। आयोग को वेतन संरचना, आर्थिक स्थिति और कर्मचारियों की मांगों का विश्लेषण करने के लिए रिपोर्ट को अंतिम रूप देने के लिए 18 महीने का समय दिया गया है। आयोग की सिफारिशों को एक जनवरी, 2026 से लागू किया जा सकता है। एक सवाल के जवाब में वुअलनाम ने कहा, ‘‘ कर्ज-जीडीपी अनुपात और राजकोषीय घाटा दोनों महत्वपूर्ण है और दोनों आपस में जुड़े हैं। हमने कहा है कि हम ऋण-जीडीपी अनुपात पर नजर रखेंगे...। लेकिन राजकोषीय घाटा और ऋण-जीडीपी अनुपात आपस में जुड़े हुए है। इसलिए हम राजकोषीय घाटे की गणना भी करते रहेंगे।’’
उन्होंने कहा, ‘‘लेकिन कुल मिलाकर हमारा मार्गदर्शक सिद्धांत कर्ज-जीडीपी अनुपात है। इसके लिए हमने लक्ष्य निर्धारित किया है कि 2030 तक हम एक प्रतिशत घट-बढ़ के साथ इसे 50 प्रतिशत पर लाएंगे। राजकोषीय घाटे का आंकड़ा भी बहुत महत्वपूर्ण है, हम उस पर भी लगातार नजर रखेंगे।’’