नयी दिल्ली : राज्यसभा में प्रमुख विपक्षी दलों के नेताओं ने सभापति राधाकृष्णन को पत्र लिखकर आग्रह किया है कि मौजूदा वैश्विक स्थिति के मद्देनजर सदन में वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय या विदेश मंत्रालय के कामकाज पर चर्चा करायी जाये। इन नेताओं का कहना है कि पिछले 16 वर्षों में दोनों मंत्रालयों के कामकाज पर चर्चा नहीं हुई है।
पत्र में यह भी कहा गया है कि ‘वर्तमान वैश्विक स्थिति, ऊर्जा संकट और भारत के लिए आगे की चुनौतियों’ को देखते हुए यह चर्चा करायी जानी चाहिए। कांग्रेस, द्रमुक, तृणमूल कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, माकपा, भाकपा, आम आदमी पार्टी, झारखंड मुक्ति मोर्चा, राजद, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शप), शिवसेना (उबाठा), नेशनल कांफ्रेंस, IUML के नेताओं और निर्दलीय सांसद कपिल सिब्बल ने पत्र पर हस्ताक्षर किये हैं।
पत्र में कहा गया है कि हस्ताक्षरकर्ता उच्च सदन के लगभग 100 सदस्यों का प्रतिनिधित्व करते हैं। विपक्षी सांसद बजट सत्र के पहले भाग से ही विदेश मंत्रालय या वाणिज्य मंत्रालय के कामकाज पर चर्चा कराने की मांग उठा रहे हैं। अब तक उच्च सदन ने बजट सत्र में पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन और ग्रामीण विकास मंत्रालयों के कामकाज चर्चा की है, और तीन और मंत्रालयों के कामकाज पर चर्चा होनी है। पत्र में कहा गया है कि 29 मंत्रालय ऐसे हैं जिन पर 2010 के बाद से चर्चा नहीं की गयी है।