अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नए बयान से अमेरिका और ईरान के बीच चल रही बातचीत को लेकर फिर से तनाव बढ़ गया है। ट्रंप ने कहा है कि अगर ईरान अमेरिका की शर्तों को नहीं मानता है तो अमेरिका दोबारा सैन्य कार्रवाई कर सकता है।
मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फत्ताह अल-सिसी के साथ बैठक के दौरान ट्रंप ने कहा कि ईरान के साथ हुआ समझौता अभी अंतिम नहीं है। उन्होंने इसे केवल एक समझौता ज्ञापन (MoU) बताया।
ट्रंप ने कहा, “ईरान के साथ डील फाइनल नहीं है। यह सिर्फ MoU है। अगर ईरान ने हमारी शर्तें नहीं मानीं तो हम फिर से बमबारी करेंगे।”
उन्होंने ईरान पर पिछले कई दशकों से गलत व्यवहार करने का आरोप लगाया और कहा कि अगर तेहरान अपने रवैये में बदलाव नहीं करता है तो अमेरिका कड़ा कदम उठाने से पीछे नहीं हटेगा।
ट्रंप ने पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा के कार्यकाल में हुई ईरान परमाणु समझौता का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय ईरान को आर्थिक राहत दी गई थी, लेकिन उन्होंने ऐसा रास्ता नहीं अपनाया।
ट्रंप ने उन खबरों को भी खारिज किया जिनमें दावा किया जा रहा था कि खाड़ी देशों के पैसे से ईरान के लिए करीब 300 अरब डॉलर का निर्माण फंड तैयार किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि अमेरिका इस तरह के किसी फंड में निवेश नहीं करेगा। हालांकि, अगर कोई अन्य देश अपनी इच्छा से निवेश करना चाहता है तो अमेरिका उसे रोकने की कोशिश नहीं करेगा।
ट्रंप ने कहा कि खाड़ी देश भी ईरान में निवेश करने से पहले उसके व्यवहार और नीतियों को देखेंगे। उनके मुताबिक, ईरान के रुख में बदलाव के बाद ही क्षेत्रीय आर्थिक गतिविधियों को आगे बढ़ाया जा सकता है।
अमेरिका और ईरान के बीच संभावित समझौते को लेकर पहले ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नजर बनी हुई है। ट्रंप के इस बयान के बाद यह सवाल फिर उठने लगा है कि दोनों देशों के बीच तनाव कम होगा या फिर स्थिति दोबारा संघर्ष की ओर बढ़ सकती है।