सबिता, सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : गैस की किल्लत का असर अब मंदिरों में भी दिखने लगा है। दीघा के जगन्नाथ मंदिर में पहले जहां हर दिन लगभग 3000 भक्तों को भोग खिलाया जाता था, वहीं अब इसे घटाकर 700 लोगों तक सीमित कर दिया गया है। मंदिर ट्रस्टी बोर्ड का कहना है कि रसोई गैस की कमी दूर होने तक यह सख्ती जारी रहेगी। मंदिर ट्रस्टी बोर्ड के सदस्य राधारमण दास ने बताया कि फिलहाल मंदिर में जितनी गैस उपलब्ध है, उसी से भगवान के लिए भोग पकाया जा रहा है। गैस सिलेंडर की कमी के कारण दीघा जगन्नाथ मंदिर में आपूर्ति पर असर पड़ा है। मंदिर में भक्तों के लिए तैयार होने वाले भोग की मात्रा अचानक काफी कम कर दी गई है। गैस की भारी कमी के बावजूद दीघा जगन्नाथ मंदिर में भगवान जगन्नाथ को प्रतिदिन भोग चढ़ाने की परंपरा बंद नहीं होगी।
राधारमण दास ने बताया कि फिलहाल मंदिर में जितनी गैस उपलब्ध है, उसी से भगवान के लिए भोग पकाया जा रहा है। अगर स्थिति और बिगड़ती है, तो वैकल्पिक व्यवस्था के रूप में लकड़ी के चूल्हे का भी इंतजाम रखा गया है। नियमों के अनुसार प्रतिदिन भोग अर्पित होता रहे, इसके लिए विशेष ध्यान रखा जा रहा है। आम भक्तों के लिए प्रसाद तैयार करने के मामले में फिलहाल मंदिर प्रशासन को कटौती करनी पड़ी है।