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ईरानी तेल की वापसी! भारत फिर खरीद को तैयार

अमेरिका की अस्थायी राहत के बाद एशियाई रिफाइनर सक्रिय, भुगतान और शर्तों पर संशय बरकरार

नई दिल्ली/सिंगापुर : भारत समेत एशिया के कई देशों के रिफाइनर ईरान से फिर तेल खरीदने की तैयारी में हैं। यह कदम संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा ईरान पर लगाए गए प्रतिबंधों में अस्थायी ढील के बाद सामने आया है, जिसका उद्देश्य ऊर्जा संकट को कम करना बताया जा रहा है।

तीन भारतीय रिफाइनरी सूत्रों के अनुसार, कंपनियां ईरानी तेल खरीदने के लिए तैयार हैं, लेकिन वे सरकार के निर्देश और वॉशिंगटन से भुगतान तंत्र सहित अन्य शर्तों पर स्पष्टता का इंतजार कर रही हैं। भारत, जिसके पास अन्य बड़े एशियाई आयातकों की तुलना में कम कच्चे तेल का भंडार है, हाल के दिनों में रूसी तेल की बुकिंग भी तेजी से कर चुका है।

एशिया के अन्य रिफाइनर भी संभावनाएं तलाश रहे हैं। डेटा फर्म Kpler के अनुसार, करीब 17 करोड़ बैरल ईरानी कच्चा तेल समुद्र में टैंकरों पर मौजूद है, जो मध्य पूर्व से लेकर चीन के आसपास के जलक्षेत्र तक फैला हुआ है। वहीं Energy Aspects ने अनुमान लगाया है कि यह मात्रा 13 से 14 करोड़ बैरल के बीच है, जो मौजूदा आपूर्ति बाधा के लगभग दो हफ्तों के बराबर है। एशिया अपनी लगभग 60% तेल जरूरतों के लिए मध्य पूर्व पर निर्भर है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ में हालिया तनाव के कारण रिफाइनर उत्पादन घटाने और ईंधन निर्यात कम करने को मजबूर हैं।

गौरतलब है कि डोनाल्ड ट्रंप ने 2018 में ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर प्रतिबंध फिर से लागू किए थे। इसके बाद चीन ईरानी तेल का सबसे बड़ा खरीदार बन गया, जहां स्वतंत्र रिफाइनर भारी छूट के कारण बड़ी मात्रा में तेल खरीदते रहे। हालांकि, ईरानी तेल की खरीद में चुनौतियां बनी हुई हैं। भुगतान व्यवस्था, बैंकिंग अनुपालन और ‘शैडो फ्लीट’ के पुराने टैंकरों पर निर्भरता जैसी समस्याएं अभी भी अनिश्चितता पैदा कर रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर स्थिति स्पष्ट होती है, तो भारत समेत कई देश तेजी से ईरानी तेल आयात फिर शुरू कर सकते हैं, जिससे वैश्विक ऊर्जा बाजार को राहत मिल सकती है।

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