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नरवणे की किताब को लेकर प्रकाशक आया सामने, कहा- कोई भी प्रति प्रकाशित नहीं

‘पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया’ (पीआरएचआई) ने पूर्व सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे के संस्मरण ‘फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी’ की अनधिकृत प्रतियां उपलब्ध होने की खबरों के बीच कहा है।

Narendra Kumar Singh

नई दिल्लीः ‘पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया’ (पीआरएचआई) ने पूर्व सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे के संस्मरण ‘फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी’ की अनधिकृत प्रतियां उपलब्ध होने की खबरों के बीच कहा है कि इसके प्रकाशन का अधिकार केवल उसके पास है और यह पुस्तक अब तक प्रकाशित नहीं हुई है।

इससे पहले, दिल्ली पुलिस ने नरवणे की अप्रकाशित पुस्तक के सोशल मीडिया पर प्रसारित होने के मामले में प्राथमिकी दर्ज की थी। प्रकाशन ने सोमवार को जारी एक बयान में कहा कि पुस्तक की मुद्रित या डिजिटल- किसी भी रूप में कोई भी प्रति जारी नहीं की गई है।

प्रकाशक ने एक बयान में कहा, ‘‘पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया यह स्पष्ट करना चाहता है कि भारतीय सेना के पूर्व प्रमुख जनरल एमएम नरवणे द्वारा लिखित आत्मकथा ‘फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी’ के प्रकाशन अधिकार केवल हमारे पास हैं। हम यह भी स्पष्ट करना चाहते हैं कि पुस्तक का प्रकाशन अब तक नहीं हुआ है।’’

बयान में कहा गया है कि कंपनी द्वारा पुस्तक की कोई भी प्रति ‘‘मुद्रित या डिजिटल रूप में’’ प्रकाशित, वितरित, बेची या किसी अन्य तरीके से जनता के लिए उपलब्ध नहीं कराई गई है।प्रकाशक ने यह भी चेतावनी दी कि वर्तमान में प्रसारित हो रहे पुस्तक के संस्करण को कॉपीराइट उल्लंघन माना जाएगा।

पुस्तक को लेकर राहुल गांधी ने क्या कहा था

पिछले सप्ताह संसद परिसर में कांग्रेस नेता राहुल गांधी को कथित तौर पर इस पुस्तक की एक प्रति दिखाते हुए देखा गया था। इस पुस्तक के जरिये ही राहुल लगातार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर चीन के साथ टकराव के दौरान उनके फैसले को मुद्दा बनाकर हमला बोल रहे हैं और सवाल उठा रहे हैं।

राहुल ने कथित रूप से इस पुस्तक के हवाले से कहा था कि जब चीन के टैंक लद्दाख में भारतीय सीमा में आ गये थे तो नरवणे ने सरकार से पूछा था कि उन्हें क्या करना चाहिए। इस पर प्रधानमंत्री ने कहा था कि जो उचित लगे करो। राहुल ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को लेकर भी कहा था कि उन्होंने सेना प्रधान को तब तक हमला नहीं करने को कहा था जबतक वह नहीं कहते। राहुल ने नरवणे की पुस्तक के हवाले से यह भी कहा था कि सेना प्रधान ने उस समय खुद को सिस्टम द्वारा अकेला छोड़ देने की भावना को महसूस किया था।

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