सन्मार्ग संवाददाता
श्री विजयपुरम : अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह के सांसद बिष्णु पद रे ने द्वीपों में केंद्रीय विश्वविद्यालय की स्थापना की मांग को लेकर जारी छात्र आंदोलन पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से तत्काल हस्तक्षेप की अपील की है। उन्होंने कहा कि प्रस्तावित “डीम्ड-टू-बी यूनिवर्सिटी” के स्थान पर केंद्रीय विश्वविद्यालय की स्थापना छात्रों और द्वीपवासियों की लंबे समय से चली आ रही मांग है।
सांसद ने इससे पूर्व 9 दिसंबर 2025 को भी इस विषय में पत्र लिखकर छात्रों की मांग को उठाया था, जिसे आवश्यक कार्रवाई हेतु गृह मंत्रालय को प्रेषित किया गया था, किंतु अब तक कोई ठोस निर्णय सामने नहीं आया है। सरकार की ओर से प्रतिक्रिया न मिलने तथा शैक्षणिक वर्ष 2025–26 की आगामी सेमेस्टर परीक्षाओं को देखते हुए द्वीपों के सातों डिग्री कॉलेजों के छात्र 3 फरवरी 2026 से शांतिपूर्ण आंदोलन पर हैं। 16 फरवरी 2026 को पूरे अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह में केंद्रीय विश्वविद्यालय की घोषणा की मांग को लेकर पूर्ण बंद देखा गया। इस दौरान बाजार, प्रतिष्ठान, परिवहन सेवाएं, होटल तथा रेस्टोरेंट बंद रहे। द्वीपों के इतिहास में इस प्रकार का पूर्ण बंद अभूतपूर्व बताया जा रहा है, जो व्यापक जनसमर्थन को दर्शाता है। सांसद ने 12 फरवरी 2026 को पुनः प्रधानमंत्री कार्यालय का ध्यान इस मुद्दे की ओर आकर्षित किया तथा 13 फरवरी को केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से व्यक्तिगत रूप से भेंट कर त्वरित हस्तक्षेप की मांग की। उसी दिन गृहमंत्री को भी पृथक पत्र सौंपा गया। 14 फरवरी को सांसद ने छात्रों के प्रतिनिधिमंडल के साथ सचिवालय में मुख्य सचिव से मुलाकात की, परंतु बैठक में कोई सकारात्मक आश्वासन नहीं मिला और छात्रों को कानून-व्यवस्था संबंधी कार्रवाई की चेतावनी दी गई। इसके बाद 15 फरवरी 2026 को दक्षिण अंडमान के जिला दंडाधिकारी द्वारा छात्रों के आंदोलन को असंवैधानिक घोषित करने का आदेश जारी किया गया। वर्तमान में लगभग 6 हजार छात्र अपने अभिभावकों के साथ पोर्ट ब्लेयर स्थित जवाहरलाल नेहरू राजकीय महाविद्यालय परिसर में धरना जारी रखे हुए हैं और केंद्रीय विश्वविद्यालय की मांग पर अड़े हुए हैं। स्थिति की गंभीरता के बावजूद अंडमान एवं निकोबार प्रशासन अथवा उपराज्यपाल कार्यालय की ओर से छात्रों के साथ कोई सार्थक संवाद नहीं होने की बात सामने आई है। साथ ही केंद्र सरकार को शीघ्र समाधान हेतु कोई प्रभावी अनुशंसा भी दिखाई नहीं दे रही है। सांसद ने आशंका जताई है कि यदि शीघ्र समाधान नहीं निकाला गया तो कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ सकती है, क्योंकि छात्र 3 फरवरी से खुले स्थानों पर दिन-रात प्रदर्शन कर रहे हैं। कई युवा राजनीतिक नेताओं तथा पंचायत प्रतिनिधियों के अपने पदों से इस्तीफा देने से स्थिति की गंभीरता और स्पष्ट हो रही है। अपने पत्राचार में सांसद बिष्णु पद रे ने केंद्र सरकार से लद्दाख मॉडल की तर्ज पर अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह में केंद्रीय विश्वविद्यालय स्थापित करने का सकारात्मक निर्णय लेने का अनुरोध किया है। साथ ही उन्होंने यह भी आग्रह किया है कि जब तक केंद्रीय विश्वविद्यालय की स्थापना नहीं होती, तब तक द्वीपों के सभी कॉलेजों की संबद्धता पांडिचेरी विश्वविद्यालय के साथ पूर्ववत जारी रखी जाए। उन्होंने छात्रों के जारी धरना और आंदोलन को शांतिपूर्वक समाप्त कराने के लिए केंद्र से शीघ्र आश्वासन जारी करने की अपील की है।