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शिवपुर की जनता का मूड : वादों से ज्यादा काम पर वोट देने का संकेत

मेघा, सन्मार्ग संवाददाता

हावड़ा : हावड़ा जिले में स्थित शिवपुर विधानसभा क्षेत्र इस बार भी चुनावी दृष्टि से बेहद अहम माना जा रहा है। यह क्षेत्र हावड़ा लोकसभा सीट के अंतर्गत आता है और हावड़ा नगर निगम के कई महत्वपूर्ण वार्ड 8, 9, 21 से 23, 43 और 47 से 50 को समेटे हुए है। आगामी 29 अप्रैल को यहां पर चुनाव होने हैं। ऐसे में यहां की जनता का मूड केवल वादों पर वोट नहीं देना है बल्कि उन्होंने काम पर वोट देने का संकेत दिया। खासकर हिंदीभाषी इलाकों की बात करें तो बेलिलियस रोड, मुसलमान पाड़ा लेन, नोनापाड़ा, बनारस रोड आदि शामिल हैं। शिवपुर क्षेत्र की खासियत इसका मिश्रित जनसंख्या ढांचा है। कुल 240 बूथ है और करीब 2 लाख मतदाताओं में 10 प्रतिशत हिन्दीभाषी मतदाता है।

राजनीतिक पृष्ठभूमि : तृणमूल का दबदबा, लेकिन चुनौती बरकरार

शिवपुर सीट पर लंबे समय तक तृणमूल कांग्रेस का प्रभाव रहा है।

2021 विधानसभा चुनाव

मनोज तिवारी (तृणमूल कांग्रेस) – 92,372 वोट (50.69%)

रथिन चक्रवर्ती (भाजपा) – 59,769 वोट (32.8%)

जगन्नाथ भट्टाचार्य (एआईएफबी) – 24,970 वोट (13.7%)

कुल मतदान – 1,82,219

जीत का अंतर : 32,603 वोट

2016 विधानसभा चुनाव

जटू लाहिड़ी (तृणमूल कांग्रेस) – 88,076 वोट

जगन्नाथ भट्टाचार्य (एआईएफबी) – 61,062 वोट

जीत का अंतर – 27,014 वोट

2026 चुनाव : नये चेहरे, नयी रणनीति

आगामी 2026 विधानसभा चुनाव में शिवपुर सीट पर मुकाबला दिलचस्प होता दिख रहा है।

तृणमूल कांग्रेस ने डॉ. राणा चटर्जी पर दांव लगाया है।

भाजपा ने अभिनेता-राजनेता रुद्रनील घोष को उम्मीदवार बनाया है।

वहीं वाम मोर्चा की ओर से जगन्नाथ भट्टाचार्य मैदान में हैं।

तीनों दलों के बीच त्रिकोणीय मुकाबले के संकेत मिल रहे हैं।

जमीनी हकीकत : विकास बनाम बुनियादी समस्याएं

चुनावी वादों और राजनीतिक बयानबाजी के बीच क्षेत्र की मूल समस्याएं आज भी जस की तस बनी हुई हैं। बेलिलियस रोड के लोहा बाजार इलाके में मौजूद गोदाम के मालिक वीराराम पुरोहित ने कहा कि यहां पर ड्रेन ओपेन और इतने बड़े हैं कि यहां पर अगर कोई बच्चा गिर गया तो उसका पता नहीं चलेगा। विनोद कुमार बंसल ने कहा कि इतने बड़े नालों को यूं ही खुला रखा गया है। इसमें कचरा जम गया है। इसे लेकर कई बार प्रशासन से शिकायतें की गयीं लेकिन कोई असर नहीं हुआ। इसके साथ ही मंयक मित्तल ने कहा कि 8 बजे के बाद इतनी दुर्गंध होती है कि खड़ा होना भी मुश्किल है। वहीं मनीष बंसल ने कहा कि कचरा व नाली के कारण इतने मच्छर हैं कि डेंगू व मलेरिया जैसी बीमारी होनी संभव है। वहीं दूसरी ओर नाले से इस पार व उस पार जाने के लिए बच्चे से बड़े एक बांस का इस्तेमाल करते हैं, पर वह भी टूट गया तो लोहे का जंग लगा पाइप से होकर गुजरना होता है। लोगों का कहना है कि यहां के नाले इतने बड़े और खुले हैं कि हादसे का डर हमेशा बना रहता है।

क्या कहना है उम्मीदवारों का

कड़ा मुकाबला, जनता की नजरें समाधान पर

शिवपुर विधानसभा में 2026 का चुनाव सिर्फ राजनीतिक दलों की ताकत का नहीं, बल्कि जमीनी मुद्दों पर उनकी गंभीरता का भी इम्तिहान होगा। जहां एक ओर तृणमूल अपनी पकड़ बनाए रखना चाहती है, वहीं भाजपा और वाम दल इस सीट को अपने पक्ष में करने के लिए पूरी ताकत झोंक रहे हैं।

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