नई दिल्लीः भ्रष्टाचार-रोधी संस्था लोकपाल ने सात लग्जरी बीएमडब्ल्यू कारों की खरीद के लिए जारी की गई अपनी विवादास्पद निविदा को रद्द कर दिया है। इस निविदा को जारी होने के लगभग दो महीने बाद ही रद्द कर दिया गया।
यह कदम इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि विपक्षी दलों और भ्रष्टाचार विरोधी कार्यकर्ताओं ने लोकपाल द्वारा उच्च श्रेणी के वाहनों की खरीद के फैसले की कड़ी आलोचना की थी। अधिकारियों ने बताया कि खरीद प्रस्ताव को रद्द करने का निर्णय लोकपाल की पूर्ण पीठ के एक प्रस्ताव के बाद लिया गया और इसके बाद लोकपाल द्वारा 16 दिसंबर, 2025 को एक शुद्धिपत्र जारी किया गया था।
लोकपाल ने 16 अक्टूबर, 2025 को लगभग पांच करोड़ रुपये में सात बीएमडब्ल्यू 3 सीरीज 330ली कारों की आपूर्ति के लिए प्रतिष्ठित एजेंसियों से निविदाएं आमंत्रित करने के वास्ते प्रस्ताव के लिए अनुरोध जारी किया था।
सफेद रंग के ‘एम स्पोर्ट’ मॉडल की खरीद का जिक्र
इस खरीद का उद्देश्य संस्था के प्रत्येक वर्तमान सदस्य, जिसमें अध्यक्ष न्यायमूर्ति ए.एम. खानविलकर (सेवानिवृत्त) और छह अन्य सदस्य शामिल हैं, के लिए एक वाहन उपलब्ध कराना है। लोकपाल के स्वीकृत पदों की संख्या आठ है। निविदा में लिखा गया था, ‘‘भारत के लोकपाल सात बीएमडब्ल्यू 3 सीरीज 330एलआई कारों की आपूर्ति के लिए प्रतिष्ठित एजेंसियों से खुली निविदाएं आमंत्रित करते हैं।’’
इसमें ‘लंबे व्हीलबेस’ और सफेद रंग के ‘एम स्पोर्ट’ मॉडल की खरीद का उल्लेख था। नयी दिल्ली में प्रस्तावित कारों की कीमत लगभग पांच करोड़ रुपये होने का अनुमान लगाया गया था। लोकपाल के इस फैसले की विपक्षी दलों ने कड़ी आलोचना की थी।
कांग्रेस ने कहा था "शौक पाल"
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने इस संस्था को "शौक पाल" करार दिया था, जबकि नीति आयोग के पूर्व मुख्य कार्यकारी अधिकारी अमिताभ कांत ने मांग की थी कि लोकपाल निविदा रद्द करे और भारत में निर्मित इलेक्ट्रिक वाहनों को प्राथमिकता दे। लोकपाल की निविदा में यह कहा गया कि चयनित विक्रेता को भ्रष्टाचार रोधी लोकपाल के चालकों और निर्दिष्ट कर्मचारियों के लिए एक व्यापक व्यावहारिक और सैद्धांतिक प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करना होगा।