सन्मार्ग संवाददाता
श्री विजयपुरम : अंडमान एवं निकोबार प्रशासन के शिक्षा निदेशालय में कार्यरत कौशल आधारित शिक्षकों की समस्याओं को लेकर भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय परिषद सदस्य एवं पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अजय बैरागी ने प्रशासन से हस्तक्षेप की अपील की है। उन्होंने इस मुद्दे को आवश्यक कार्रवाई हेतु मुख्य सचिव के समक्ष प्रस्तुत किया है।
श्री बैरागी ने बताया कि समग्र शिक्षा अभियान के तहत विभिन्न द्वीपों में पदस्थापित ये शिक्षक अन्य श्रेणी के शिक्षकों के समान दायित्व निभा रहे हैं, लेकिन वे कई कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं। इन शिक्षकों ने उनसे संपर्क कर अपनी समस्याओं का विवरण साझा किया और भेदभाव, वेतन असमानता और सेवा संबंधी अन्य मुद्दों को उजागर किया।
पत्र में श्री बैरागी ने कहा कि कौशल आधारित शिक्षकों द्वारा प्रस्तुत ज्ञापन स्पष्ट और तथ्यात्मक है। इसमें शिक्षा निदेशालय के अंतर्गत अन्य शिक्षकों की तुलना में उनकी वेतन संरचना और लाभों में असमानता का उल्लेख किया गया है। शिक्षक यह मांग कर रहे हैं कि उन्हें भी वेतन वृद्धि और अन्य लाभ समान रूप से प्रदान किए जाएँ, जो अन्य शिक्षण श्रेणियों को पहले से मिल रहे हैं।
उन्होंने प्रशासन से अनुरोध किया है कि इस मामले को गंभीरता और सहानुभूति के साथ देखा जाए। मुख्य सचिव से यह अपेक्षा जताई गई है कि संबंधित अधिकारियों को दिशा-निर्देश जारी किए जाएँ और कौशल आधारित शिक्षकों की लंबे समय से लंबित समस्याओं का शीघ्र समाधान किया जाए। इस पहल का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि शिक्षक अपने कर्तव्यों का निष्पक्ष और समर्पित रूप से पालन कर सकें, बिना किसी असमानता या अन्याय के।
शिक्षा विशेषज्ञों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों का कहना है कि कौशल आधारित शिक्षक शिक्षा प्रणाली का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। उनके समुचित वेतन, लाभ और समान अवसर सुनिश्चित करना न केवल उनकी पेशेवर प्रतिबद्धता को बढ़ावा देगा, बल्कि बच्चों की गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लक्ष्य को भी सशक्त करेगा।
स्थानीय शिक्षकों और समुदाय ने इस कदम की सराहना की है। उनका कहना है कि लंबे समय से यह समस्या बनी हुई थी और प्रशासन का ध्यान इस ओर आकर्षित होना आवश्यक था। अब उम्मीद जताई जा रही है कि मुख्य सचिव और संबंधित अधिकारियों द्वारा उचित कार्रवाई के बाद शिक्षकों की परेशानियों का समाधान जल्द संभव होगा।
इस तरह, कौशल आधारित शिक्षकों के मुद्दे का मुख्य सचिव के समक्ष उठाया जाना शिक्षा व्यवस्था में समानता और न्याय सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।