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अंतरराष्ट्रीय ट्रांसशिपमेंट पोर्ट राष्ट्रीय महत्व की परियोजना : सांसद अरुण सिंह

सन्मार्ग संवाददाता

श्री विजय पुरम : माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के दूरदर्शी नेतृत्व में केंद्र सरकार ने अंडमान तथा निकोबार द्वीपसमूह में मेगा अवसंरचना परियोजनाओं के विकास हेतु कई हजार करोड़ रुपये का निवेश किया है, जिससे आने वाले वर्षों में क्षेत्र में व्यापक परिवर्तन आने की उम्मीद है। इन पहलों से द्वीपवासियों को उल्लेखनीय लाभ मिलेगा और द्वीपसमूह सतत आर्थिक विकास के मार्ग पर सुदृढ़ रूप से अग्रसर होगा। यह बात हाल ही में यहां मीडिया से बातचीत के दौरान माननीय राज्यसभा सांसद श्री अरुण सिंह ने कही। प्रमुख पहलों पर प्रकाश डालते हुए माननीय सांसद ने बताया कि कैंपबेल बे में प्रस्तावित अंतरराष्ट्रीय कंटेनर ट्रांसशिपमेंट पोर्ट (आईसीटीपी) राष्ट्रीय महत्व की एक प्रमुख रणनीतिक परियोजना है। उन्होंने हाल के वर्षों में पूर्ण की गई कई ऐतिहासिक परियोजनाओं का भी उल्लेख किया, जिनसे द्वीपवासियों को व्यापक लाभ हुआ है, जिनमें समुद्र के भीतर ऑप्टिकल फाइबर केबल (सीएएएनआई) परियोजना का शुभारंभ, आज़ाद हिंद सेतु तथा वीर सावरकर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के नए टर्मिनल भवन का लोकार्पण शामिल है। द्वीपसमूह की यात्रा पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए अरुण सिंह ने कहा कि भारत के स्वतंत्रता सेनानियों के सर्वाच्च बलिदानों के कारण अंडमान तथा निकोबार द्वीपसमूह ने ‘तीर्थ स्थल’ का गौरव प्राप्त किया है। उन्होंने नेताजी सुभाष चंद्र बोस, वीर सावरकर तथा देश के स्वतंत्रता संग्राम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले अनेक अज्ञात नायकों को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। वीजी-जी राम जी योजना का उल्लेख करते हुए सांसद ने बताया कि यह ‘विकसित भारत’ की परिकल्पना का हिस्सा है, जिसे जी राम जी अधिनियम, 2025 के माध्यम से लागू किया गया है और जो मनरेगा का स्थान लेती है। यह नया परिकल्पना ग्रामीण रोजगार के आधुनिकीकरण के उद्देश्य से तैयार किया गया है, जिसके अंतर्गत 125 दिनों के रोजगार की गारंटी, रोजगार सृजन को टिकाऊ अवसंरचना निर्माण से जोड़ना, विकसित ग्राम पंचायतों के माध्यम से डिजिटल योजना को सशक्त बनाना तथा विकसित भारत/2047 के लक्ष्य के अनुरूप तेज और अधिक पूर्वानुमेय मजदूरी भुगतान सुनिश्चित करना शामिल है। उन्होंने आगे कहा कि इस योजना को अधिक जनहितैषी बनाने के लिए इसमें कई संशोधन किए गए हैं। परिसंपत्ति सृजन पर विशेष जोर देते हुए यह योजना उन्नत प्रौद्योगिकी का उपयोग करती है तथा केंद्र-राज्य वित्तपोषण मॉडल को अपनाती है। यह योजना चार प्राथमिक क्षेत्रों में रोजगार सृजन को अवसंरचना विकास से जोड़ने के लिए तैयार की गई है, जिनमें जल संबंधी कार्यों के माध्यम से जल सुरक्षा, मूल ग्रामीण अवसंरचना, आजीविका से संबंधित अवसंरचना तथा अत्यधिक मौसम घटनाओं के प्रभाव को कम करने हेतु विशेष कार्य शामिल हैं।

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