बरकरार रहेगा भगोड़ा घोषित करने का आदेश
जितेंद्र, सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : टूलू मंडल को हाई कोर्ट से कोई राहत नहीं मिल पाई।। जस्टिस सौगत भट्टाचार्य ने मंगलवार को मामले की सुनवाई के बाद उसके पिटीशन को खारिज कर दिया। जस्टिस भट्टाचार्य ने कहा कि उसके आवास से 25 करोड़ नकद और करीब पांच किलो सोना बरामद हुआ था। इसके अलावा बैंकों में भी काफी रकम है। यह प्रोसीड ऑफ क्राइम है। यानी गैरकुननी तरीके से अर्जित किया गया है। लिहाजा पिटीशन को खारिज किया जाता है।
जस्टिस भट्टाचार्य ने मामले की सुनवाई के दौरान एक विकल्प का जिक्र किया। पिछले आदेश में भी उन्होंने कहा था। टूलू मंडल मजिस्ट्रेट के सामने हाजिर होगा और मजिस्ट्रेट कानून के तहत कार्रवाई करेंगे। अपने आदेश में उन्होंने इस विकल्प का जिक्र नहीं किया। उसकी तरफ से बहस कर रहे सीनियर एडवोकेट सिद्धार्थ दवे ने 20 जुलाई को जारी गैरजमानती वारंट और 10 अगस्त को भगोड़ा घोषित किए जाने के आदेश के औचित्य पर सवाल उठाया। उनका सवाल था कि लोवर कोर्ट किस आधार पर इस निष्कर्ष पर पहुंच गया कि पेटीशनर गिरफ्तारी से बचने की कोशिश कर रहा है। गिरफ्तारी का वारंट 30 जुलाई को जारी किया गया और 10 अगस्त को अदालत में उसे भगोड़ा करार दिया। दूसरी तरफ हकीकत तो यह है कि वह 23 मई को ही देश छोड़कर विदेश जा चुका था। मामले की कार्यवाही जुलाई के आखिर में शुरू हुई थी। उनका सवाल था कि क्या कोर्ट गिरफ्तारी के इस वारंट को सही करार देगा। राज्य सरकार ने टूलू मंडल को स्टोन माफिया करार देते हुए आरोप लगाया है कि वह अवैध तरीके से पत्थर की खदान से पत्थर निकाल रहा था। राज्य सरकार की तरफ से पैरवी कर रहे एडिशनल एडवोकेट जनरल विल्वादल भट्टाचार्य ने कहा कि उसके फरार होने के बाद से सरकार को पत्थरों से मिलने वाले राजस्व में भारी वृद्धि हुई है। उसे लोअर कोर्ट में मजिस्ट्रेट का समय हाजिर होना पड़ेगा और मजिस्ट्रेट इस दिशा में उचित कार्रवाई करेंगे। उसके एडवोकेट सिद्धार्थ दवे ने कहा कि वह यह नहीं कह रहा है कि हम देश छोड़कर जा चुके है इसलिए जो मर्जी है करो। वह अपने बचाव के लिए कानूनी उपाय पर अमल करना चाहता है। उसके खिलाफ गिरफ्तारी का वारंट जारी करके अग्रिम जमानत लेने की राह बंद कर दी गई है। जस्टिस भट्टाचार्य ने पिटीशन को खारिज करते हुए दखल देने से इनकार कर दिया।