राज्यसभा में कार्यवाही की शुरुआत।  
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रुपया और रसोई गैस पर संसद में सरकार घिरी

राज्यसभा में कांग्रेस के नीरज डांगी ने रुपये के अमेरिकी डॉलर की तुलना में कमजोर होने और रसोई गैस संकट के कारण भारतीय अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले प्रभावों को लेकर केंद्र सरकार को आड़े हाथों लिया।

नई दिल्लीः राज्यसभा में सोमवार को भारतीय मुद्रा रुपये के अमेरिकी डॉलर की तुलना में कमजोर होने और रसोई गैस संकट के कारण भारतीय अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रों एवं आम आदमी पर पड़ने वाले प्रभावों को लेकर केंद्र सरकार को आड़े हाथ लेते हुए कांग्रेस के एक सांसद ने दावा किया कि स्थितियां सरकार के हाथों से निकल रही हैं।

उच्च सदन में अनुदान की अनुपूरक मांगों पर चर्चा शुरू करते हुए कांग्रेस के नीरज डांगी ने कहा कि ग्रामीण विकास एवं स्वास्थ्य क्षेत्रों के लिए किए गए आवंटन का प्रभावी क्रियान्वयन बहुत आवश्यक है क्योंकि इससे समाज के कमजोर वर्ग और ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को बहुत लाभ मिलता है। डांगी ने देश की अर्थव्यवस्था की चर्चा करते हुए रुपये के गिरते मूल्य पर चिंता जतायी और कहा कि यह अमेरिकी डॉलर की तुलना में 94 रुपये पहुंच गया है। उन्होंने कहा कि यह, ऐसी स्थिति में बाजार की सामान्य स्थिरता के बजाय व्यापक आर्थिक प्रबंधन में गहरी कमजोरी को दर्शाता है।

रुपये के लगातार गिरने पर भारतीय रिजर्व बैंक और सरकार द्वारा कोई हस्तक्षेप नहीं किया जाना, सरकार की जवाबदेही पर सवालिया निशान लगाता है।

कांग्रेस सदस्य ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पश्चिम एशिया के वर्तमान संकट में अमेरिका के दबाव में रहे हैं। उन्होंने कहा कि जब पाकिस्तान के खिलाफ ऑपरेशन सिंदूर हुआ तो उस समय भी वह अमेरिका के दबाव में थे। उन्होंने कहा कि कमजोर भारतीय मुद्रा ने कच्चे तेल, खाने के तेल, उर्वरक, इलेक्ट्रानिक्स एवं चिकित्सा सामग्री जैसे जरूरी आयात की लागत को बढ़ा दिया जिससे महंगाई बढ़ी है। उन्होंने कहा कि मुद्रा में एक प्रतिशत का अवमूल्य महंगाई को दशमलव दो से दशमल तीन अंक तक बढ़ाता है।

एलपीजी की कमी से व्यवसायों में संकट पैदा हो रहा है, होटल बंद हो रहे हैं, घरेलू बजट गड़बड़ा रहा है तथा कालाबाजारी बढ़ रही है।

कांग्रेस सदस्य ने कहा कि रुपये के लगातार गिरने पर भारतीय रिजर्व बैंक और सरकार द्वारा कोई हस्तक्षेप नहीं किया जाना, सरकार की जवाबदेही पर सवालिया निशान लगाता है। उन्होंने सरकार से ठोस कदम उठाने, आयात शुल्क घटाने, जीएसटी दरों को कम करने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि रसोई गैस की किल्लत से राजनीतिक और आर्थिक असंतोष बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि एलपीजी की कमी से व्यवसायों में संकट पैदा हो रहा है, होटल बंद हो रहे हैं, घरेलू बजट गड़बड़ा रहा है तथा कालाबाजारी बढ़ रही है।

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